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Acharya Mukesh

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

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“कुछ अलग करना है, तो भीड़ से हट कर चलो, भीड़ साहस तो देती है, पर पहचान छिन लेती है।”

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Monday, 18 March 2019

महा-परिवर्त्तन RAHU KETU TRANSIT 7 मार्च, 2019 / राहु केतु का राशि परिवर्तन 7 मार्च, 2019 / जानें क्या होगा 12 राशियों का हाल / राहु-केतु गोचर 2019 भविष्यफल



राहु केतु संचार : उन्नत पथ पर केन्द्रित रहकर विजयी बनें


राहु और केतु ग्रह राशि बदलने वाले हैं और आपके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लेंगे। वे आपके पिछले जीवन कर्म और आपकी वर्तमान जीवन स्थितियों को आकार देने में इसकी भूमिका के संकेतक हैं।


वैदिक ज्योतिष में छाया ग्रह के तौर पर जाना जाने वाले राहु और केतु का गोचर काफी महत्वपूर्ण होता है। अगर यह जातक की कुंडली में मजबूत स्थिति में है तो जीवन में मान-सम्मान और सफलता प्रदान करता है, वहीं अगर प्रतिकूल हो तो स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करने के साथ ही कार्य में भी बाधाएं उत्पन्न करता है।



  7 मार्च, 2019 को, सांसारिक सुख, संपत्ति और विलासिता में रुचि पैदा करने में सक्षम ग्रह राहु, मिथुन राशि में और आध्यात्मिक ज्ञान में मजबूत रुचि बनाने में सक्षम ग्रह केतु धनु में प्रवेश करेंगे | और इन राशि में 23 सितंबर, 2020 तक रहेंगे । कुल मिलाकर, राहु और केतु के इस संचार 
( TRANSIT) से आप ध्यान केंद्रित, जीत और प्रगति के पथ में चल सकते हैं।


              राहु और केतु का यह संचार(Transit) से क्या प्रभाव



7 मार्च, 2019 का यह संचार, विचारों और अवधारणाओं को जानने के लिए जिज्ञासा लाएगा और अच्छे परिणाम ला सकता है। बहुमुखी प्रतिभा और मानसिक क्षमता बढ़ाने का यही समय है। इस 18 महीने की अवधि के दौरान आप अपने बेहतर प्रयासों, संचार और ज्ञान के माध्यम से अपने जीवन में सभी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। ये ग्रह आपको आपकी आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकते हैं। दूसरी ओर यह बेचैनी और आतुरता लाकर अवनति  का कारण बनती है।

ज्योतिषाचार्य एवं शोधकर्त्ता मुकेश के अनुसार आनेवाले  १८ महीने राहु और केतु का ये महापरिवर्तन कुछ राशियों के लिए शुभ और कुछ राशियों के लिए सावधानी बरतने की अवधी होगी। दोनों ग्रहों के अपनी मित्र राशि में प्रवेश से देश का वातावरण बदलेगा। आतंक पर लगाम लगेगी। रोजगार और व्यापार बढ़ेगा। राहु-केतु आकस्मिक धन प्राप्ति, स्थान परिवर्तन, उच्च पद प्राप्त करना, मान-प्रतिष्ठा के कारक माने जाते हैं। इस समय राहु का राशि परिवर्तन 3 राशियों तुला, कुंभ, मिथुन पर अच्छा होगा। केतु को मोक्ष का भी देवता माना जाता है।
जिस जातक की कुंडली में राहु -केतु जनित कोई दुर्योग जैसे राहु+सूर्य , केतु -सूर्य, राहु -चंद्र, केतु-चंद्र ग्रहण योग, या राहु-मंगल अंगारक योग, राहु -शनि विष योग अथवा गुरु -चांडाल योग  इत्यादि  हो  तो उसे इस गोचर के पहले  अपनी कुंडली के विषय में योग्य ज्योतिष से संपर्क जरूर कर  लेना चाहिए.. अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। 

आचार्य मुकेश से संपर्क करने हेतु :- 

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आपके जीवन में राहु और केतु का प्रभाव

वैदिक ज्योतिष के अनुसारछाया ग्रहों राहु और केतु के बारे में त्वरित और रोचक तथ्य और यह आपके जीवन को कैसे प्रभावित करेगा आदि विषयों नीचे दिए गए है ।

राहु और केतु कर्मिक ग्रह हैं

राहु को नौ ग्रहों में सबसे मजबूत माना जाता है:-


राहु सांसारिक इच्छाओं, विदेशी भूमि और विदेशियों से संबंधित है


राहु तेज अहंकार, कठोर भाषण और विपत्तियों से संबंधित है


राहु को वृषभ, कैंसर और धनुष में मजबूत माना जाता है


केतु आध्यात्मिकता, मोक्ष और दिव्य ज्ञान से संबंधित है


केतु गूढ़ प्रकृति, गुप्त अध्ययन और मानसिक क्षमताओं में रूचि देते हैं


केतु ने अलगाव, अकेला और भागने की प्रवृत्ति को जोर बना देता है


केतु में मंगल के गुण होते हैं


दृढ़ता से रखा केतु दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति देगा


वृश्श्चिक, मिथुन और धनु 
राशि में केतु को मजबूत माना जाता है.




चंद्र राशि मेष के लिए राहु-केतु गोचर 
2019 भविष्यफल

राहु का तृतीय भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से राहु की मिथुन राशि व तृतीय भाव में गोचरीय स्थिति शुभ है जो आपके जीवन में उत्तम भाग्य व समृद्धि लाएगी| तृतीय भाव में राहु की स्थिति को आपको साहसी, जोखिम लेने वाला तथा दृढ़ निश्चयी बनाती है| आपके भाई-बहन आपसे काफी अपेक्षाएं रखेंगे| आपके मन में उन चीजों को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है जो लंबे समय से अनिश्चित रही हैं| आप अपनी विचारधाराओं को लेकर काफी खोजी प्रवृति के हो सकते हैं जिससे दूसरों को भी बुरा नहीं लगेगा। इस समयावधि में छोटे भाई-बहनों के साथ आपका संबंध उत्तम रहेगा| राहु की यह स्थिति आपको सिंहवत शक्ति व साहस प्रदान करेगी| आप निज उद्योग से सफलता प्राप्त करेंगे| आप रतिक्रियाओं में अधिक लिप्त हो सकते हैं| आप भाग्यशाली होंगे तथा धन संग्रह करने में सफल रहेंगे| आप इस समयकाल के दौरान त्वरित निर्णय लेंगे| आपकी अपने आसपास मौजूद लोगों से उत्तम वार्तालाप होगी| आपके द्वारा लिए गए निर्णय लाभ प्रदान करेंगे| वैसे यह महत्वपूर्ण है कि आप जल्दबाजी में कोई भी फैसला न लें|

राहु के तीसरे भाव में स्थिति आपके लिए शुभ संकेत लेकर आ रही है। आपको अच्छी नौकरी मिल सकती है, अगर जॉब बदलना चाहते हैं तो उसके लिए भी शुभ समय है। लंबी दूरी की बजाय छोटी दूरी की यात्रा आपको सुखद परिणाम देगी। आपका साहस और मनोबल मजबूत होगा। कॅरियर में भी प्रमोशन मिलने की पूर्ण संभावना है। इसके साथ-साथ आप विदेश यात्रा की योजना भी साकार कर सकते हैं।


केतु का नवम भाव में गोचरफल

केतु का आपकी चंद्र राशि से नवम भाव व धनु राशि में गोचर संतोषजनक परिणाम देगा| आप आध्यात्मिक विचारधाराओं और दार्शनिक विचारों में रूचि ले सकते हैं। आप किसी धार्मिक स्थल या तीर्थयात्रा पर पारिवारिक सदस्यों के साथ जा सकते हैं| आप में से कुछ लोग धार्मिक अभ्यासों जैसे कि उपवास और दिव्य अनुष्ठानों का पालन करने के इच्छुक होंगे जबकि अन्य लोग किसी दिव्य स्थान की दिव्यता और वैज्ञानिक / दार्शनिक विचारों के प्रति मोहित हो सकते हैं| इस दौरान आपके पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है| आपको अन्य जातियों व धर्म के लोगों से लाभ मिलेगा| आप विदेश यात्रा भी कर सकते हैं| आप स्वयं पर आज्ञाकारिता और सख्त नियम लागू करना चाहेंगे |

चंद्र राशि वृषभ के लिए राहु-केतु गोचर 
2019 भविष्यफल


राहु का द्वितीय भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से द्वितीय भाव में राहु का गोचर निष्पक्ष परिणाम प्रदान करेगा। घर पर पारिवारिक सदस्यों के बीच गलतफहमी बढ़ सकती है| राहु की यह स्थिति आपको विस्मयकारी व संदेहास्पद बनाती है| मिथ्या भाषण करने से बचना ही बेहतर होगा वरना आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं| आपका स्वभाव कलहकारी हो सकता है| होगा| छात्रों की शिक्षा में विघ्न उत्पन्न होंगे| आपको अपनी आर्थिक स्थिति पर कड़ी नज़र रखनी होगी| अवांछित ख़र्चों से बचना ही बेहतर होगा| आपको भविष्य की ज़रूरतों को पूर्ण करने के लिए धन संचय प्रारंभ कर देना चाहिए| अज्ञात स्रोतों या विदेशी लोगों से लेन-देन करने से बचना चाहिए| यही वह समय है जब आप काफी धन ख़र्च करने पर बाध्य हो सकते हैं| आने वाले वर्षों में स्वयं की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए आपको अपने ख़र्चों पर लगाम लगाने की ज़रूरत है| द्वितीय भाव में राहुआपके लिए थोड़ा कष्टकारी साबित हो सकता है। आपको धन हानि की प्रबल संभावना है, कोई गलतफहमी घर के माहौल को बिगाड़ सकती है, पहले से ही सावधन रहें। गोचर के दौरान आपके व्यय बढ़ेंगे और साथ ही तनाव में भी होगी। आपको अपनी सेहत का भी विशेष ध्यान देना होगा, गोचर की पूरी अवधि में लोन लेने से बचें और न ही किसी को उधार दें।

केतु का अष्टम भाव में गोचरफल

चंद्रमा से अष्टम भाव में केतु की स्थिति आपको अनोखा अनुभव कराती है। घर और कार्यस्थल पर आपको एक जिम्मेदार व्यक्ति बनना होगा। अनावश्यक चर्चाओं या दूसरों की अनुपस्थिति में उनके बारे में टीका-टिप्पणी करने से बचें| केतु की यह स्थिति आपको अपरंपरागत विषयों पर एक उत्तम दार्शनिक ज्ञान व समझ प्रदान करेगी| इस दौरान दार्शनिक / आध्यात्मिक विषयों से जुड़े व्यक्तियों के साथ आपकी वार्तालाप हो सकती है| आपको ज्ञान और सलाह के रूप में अचानक लाभ मिलेगा जो आपके जीवन का एक अभिन्न अंग बन जाएगा। इस समयावधि में आप स्वयं के अंदर आए हुए परिवर्तनों को देखकर आश्चर्यचकित होंगे |

चंद्र राशि मिथुन के लिए राहु-केतु गोचर
2019 भविष्यफल


राहु का चंद्र राशि पर से गोचरफल

आपकी चंद्र राशि पर राहु का गोचर आपको आने वाले दिनों में बहुत सारे मिश्रित परिणाम प्रदान करेगा। आप एक नए रूप और आकर्षक व्यवहार का आनंद लेंगे| आपके चरित्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। आप यात्रा करने में रूचि लेंगे तथा प्रमाणिक व आयातित उत्पादों का संचय करेंगे| आपके दृष्टिकोण में अस्थिरता की भावना रहेगी| आप फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार इत्यादि से संबंधित प्रसिद्ध / चीजों को प्राप्त करने के लिए नियत हैं। आपको एक ही स्थान पर रहने में कोई दिलचस्पी नहीं होगी इसके बजाय आप अनेक छोटी-मोटी यात्राएं करने में रुचि रखेंगे| आपकी समस्त गतिविधियों में निराशा की भावना होगी तथा यदि आपके प्रयास अपेक्षा के अनुसार परिणाम नहीं देंगे तो आप अनियंत्रित व्यवहार कर सकते हैं|

केतु का सप्तम भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से सप्तम भाव में चंद्रमा का गोचर आपको उम्मीद से कम परिणाम देगा| आप में से कुछ लोगों की सांसारिक मामलों में रूचि कम हो सकती है| वैवाहिक संबंधों में ग़लतफ़हमियाँ बढ़ सकती हैं| आपका जीवनसाथी या व्यापारिक भागीदार आपकी अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवहार नहीं कर सकता है| इससे आपकी योजनाएं बर्बाद हो सकती हैं या फिर आपको अपनी योजनाओं को कई बार पुनः निर्धारित करना पड़ सकता है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से आपके प्रदर्शन पर असर डाल सकता है। यह वह अवधि है जब आपको अपनी नियमित दिनचर्या के अलावा जीवन के अन्य सभी पहलुओं का भी ध्यान रखना होगा। इस अवधि में आप अपने कार्यक्षेत्र और परिवार से संबंधित पहलुओं में कोई बड़ा बदलाव करने की सोच सकते हैं। अचानक कोई भी बड़ा परिवर्तन न करें क्योंकि इससे आपका उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता है। सभी पहलुओं के प्रति सतर्क रहें ताकि आप किसी भी घटना से ज्यादा प्रभावित न हों।

चंद्र राशि कर्क के लिए राहु-केतु गोचर 
2019 भविष्यफल


राहु का द्वादश भाव में गोचरफल

राहु के आपकी चंद्र राशि से बारहवें भाव में मिथुन में गोचर से आपको स्वयं के वास्तविक स्वरुप को पहचानने में सहायता मिलती है| जीवन में अप्रत्याशित और असंगत गतिविधियों से भरे एक वर्ष के उपरांत आप तरोताज़ा महसूस करेंगे| इस समयावधि में आपके पास विदेश में जाकर बसने का विकल्प मौजूद रहेगा| इस दौरान आप बहुत सारा धन खर्च कर सकते हैं तथा आपको खर्चों को नियंत्रित करना मुश्किल लगेगा। आप मनोरंजन व प्रसन्नता के साधनों का लुत्फ़ लेने पर काफी समय बिता सकते हैं। हालांकि यह आपको रोमांचित कर सकता है परंतु इससे आपको अच्छे परिणाम नहीं मिलेंगे| इसलिए बेहतर होगा कि आप मनोरंजन से संबंधित गतिविधियों पर अधिक समय और पैसा खर्च न करें। कार्यक्षेत्र की व्यस्तता व पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते आपकी नींद में कमी आ सकती है|

केतु का षष्ठ भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से छठे भाव में धनु राशि में केतु का यह गोचर आपको लगातार संघर्ष और कड़े प्रयासों के बाद कुछ राहत दे सकता है| आवश्यकता पड़ने पर आपकी बुद्धिमता आपकी सहायता करेगी| आपको भविष्य के लिए रणनीतियाँ बनाने व आराम करने का समय मिलेगा। आपको आधिकारिक मामलों के प्रति सावधान रहना होगा। कार्यस्थल पर प्रचलित बुरा वातावरण ठीक हो जाएगा। बचकानी बातों से कोई भी निष्कर्ष निकालने से बचें| स्वास्थ्य मामलों में स्वयं के द्वारा उठाए गए किसी भी कदम के प्रति सचेत रहे| मामा व भतीजे / भतीजी के साथ किसी भी विवादास्पद बहस में पड़ने से बचें|  

चंद्र राशि सिंह के लिए राहु-केतु गोचर 
2019 भविष्यफल


राहु का प्रथम भाव में गोचरफल

राहु का आपकी चंद्र राशि से एकादश भाव में मिथुन राशि में गोचर अनुकूल परिणाम प्रदान करने वाला माना जाता है। आपको अप्रत्याशित लाभ का अनुभव होगा। बड़े भाई- बहनों से आपके संबंध उत्तम रहेंगे क्योंकि आप उनका सहयोग पाकर प्रसन्न होंगे| इस दौरान कार्यक्षेत्र में उन्नति चाहने वालों की त्वरित प्रगति हो सकती है। पति और पत्नी के बीच चल रही ग़लतफ़हमी आसानी से दूर हो जाएगी। आपको अपने जीवनसाथी के परिवार से अच्छा सहयोग मिलेगा| आप विदेश यात्रा या विदेशी लोगों के माध्यम से धन संचय करेंगे।

केतु का पंचम भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से पंचम भाव में धनु राशि में केतु का गोचर एक अच्छी स्थिति नहीं है| आप घर और कार्यालय में दूसरों के साथ बातचीत करने में कम रुचि लेंगे| भाग्य के भरोसे न बैठे रहें इसके बजाय अपनी तरफ से पहल करने का प्रयास करें। घर पर बच्चों के साथ उत्तम संबंध बनाए रखें| उन्हें प्रेरित करने के लिए प्रेरणादायक विचार और सलाह का प्रयोग करें। हालांकि यह एक भयावह समयावधि नहीं है फिर भी आपको सुरक्षित रहने की सलाह दी जाती है।

चंद्र राशि कन्या के लिए राहु-केतु गोचर
2019 भविष्यफल



राहु का दशम भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से दशम भाव में मिथुन राशि में राहु का गोचर एक अच्छा संकेत है। मिथुन राशि में राहु का गोचर आपकी सामाजिक स्थिति को कई गुना बढ़ाएगा| आप अपने कार्यस्थल पर एक नई ऊँचाई छुएंगे व मान्यता प्राप्त करेंगे| आप नई चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए उत्सुक रहेंगे और आखिरकार नए कीर्तिमान स्थापित करने में सफल रहेंगे| इस प्रक्रिया में आप अपनी उपलब्धियों को पुनः लिखेंगे। आप अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित अच्छे रिश्ता बनाये रखें होंगे। आपका पेशा महत्वपूर्ण अवसरों पर आपकी मौजूदगी की मांग करता है। आपको कार्यस्थल पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। आपको आधिकारिक कारणों से विदेशी देशों की यात्रा करने का मौका मिल सकता है। आपकी आधिकारिक कारणों से विदेशी लोगों के साथ मुलाकात या बातचीत हो सकती है| आप निष्पादित होने के लिए लंबित अनेक योजनाओं का अनुभव करेंगे।

केतु का चतुर्थ भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से चतुर्थ भाव में धनु राशि में केतु का गोचर साधारण परिणाम प्रदान करेगा| चंद्रमा चिह्न से चौथे सदन के माध्यम से धनुष में केतु का पारगमन मामूली परिणाम प्रदान करेगा। यद्यपि आप खुश रहेंगे परंतु आपको लग सकता है कि चीजें आपकी अपेक्षाओं के अनुसार नहीं हो रही हैं| अपनी माता के साथ किसी गंभीर विवाद में शामिल न हों। आप अपनी राय को सार्वजनिक न करें। वाहनों को गेराज में ले जाकर मरम्मत करवाने के लिए यह एक अच्छा समय है। अपनी माता के साथ वार्तालाप करने के लिए समय निकालें| इससे आप दोनों का संबंध अधिक सुदृढ़ हो सकता है| बाहर का भोजन खाने से बचें। चतुर्थ भाव में केतु की स्थिति उपवास रखने व आहार संबंधी मामलों में कड़े नियमों का पालन करने के लिए उत्तम है।

चंद्र राशि तुला के लिए राहु-केतु गोचर
2019 भविष्यफल


राहु का नवम भाव में गोचरफल

राहु आपकी राशि से नवम भाव में गोचर करेगा। इस दौरान आप किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं और यह यात्रा आपके लिए अनुकूल रहेगी। गोचर के दौरान आपको किसी पवित्र नदी में पण्यस्नान लगाने का शुभ अवसर प्राप्त होगा। इसके अलावा आपको कोई ऐसा शुभ समाचार मिल सकता है अपने पिता के साठा अच्छा रिश्ता बनाए रखें जिसकी शायद ही आपने कल्पना की हो। प्रेम जीवन में भी सुधार देखने को मिलेगा। आप प्रेमी के साथ अच्छा समय व्यतीत करेंगे।

केतु का तृतीय भाव में गोचरफल

केतु आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर करेगा। इस दौरान आप अधिक ऊर्जावान रहेंगे और डटकर चुनौतियों का सामना करेंगे। परिजनों के साथ आपको भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है अतः अपनी सेहत पर पूरा ध्यान दें। मेहनत के कारण आप काम में सफल रहेंगे। कई बार छोटी-मोटी यात्राओं पर जाना पड़ सकता है।सूचना संचार में अधिक ध्यान दे| अपने छोटे बाई-बहनों के साथ अच्छा रिश्ता बनाए रखे|

चंद्र राशि वृश्चिक के लिए राहु-केतु गोचर 
2019 भविष्यफल


राहु का अष्टम भाव में गोचरफल

राहु आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर करेगा। इस स्थिति में आपको धन की हानि हो सकती है इसलिए पैसों का निवेश सोच-समझकर करें। अचानक किसी विवाद के कारण घर का माहौल अशांत रहने के संकेत हैं। आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें और इसको लेकर किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। वाहन चलाते समय नियमों का पालन करें। पिता जी की सेहत की देखभाल करें। ससुराल पक्ष की ओर से आपको कोई सुंदर तोहफ़ा मिल सकता है। जीवन में उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। इसके अलावा आपको अचानक उच्च लाभ मिलने के भी योग हैं।

केतु का द्वितीय भाव में गोचरफल

केतु आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर करेगा। इस दौरान आपके परिवार में थोड़ा अशांत वातावरण रह सकता है। परिजनों के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास करें। आपकी वाणी में थोड़ी कड़वाहट नज़र आ सकती है। ध्यान रखें, इससे आपके रिश्ते बिगड़ सकते हैं अतः सभी के साथ प्रेम से बातचीत करें और वाहन चलाते समय पूरी सावधानी बरतें। इस दौरान आप थोड़े भ्रम की स्थिति में रहेंगे और लोगों को आपके व्यवहार को समझना ज़रा मुश्किल होगा। गोचर की अवधि में आपकी सेहत कमज़ोर रह सकती है इसलिए अपनी सेहत पर ध्यान दें। धार्मिक कार्यों में आपका मन लगेगा और दान-पुण्य करने में भी सक्रिय रहेंगे।

चंद्र राशि धनु के लिए राहु-केतु गोचर 
2019 भविष्यफल



राहु का सप्तम भाव में गोचरफल

आपकी चंद्र राशि से सप्तम भाव में मिथुन राशि में राहु का गोचर एक मध्यम स्थिति मानी जाती है| यदि आप नौकरी की तलाश में हैं तो आपको कार्यक्षेत्र से संबंधित अनेक विकल्प प्राप्त होंगे| यदि आप व्यवसाय शुरू करने में रुचि रखते हैं तो इस समयावधि में वह बढ़ेगा। यद्यपि आपको व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा फिर भी आप उन्नति कर पाएंगे| आप अनेक यात्राएं करेंगे और नए लोगों से मिलेंगे। व्यस्तता के चलते आपको दूसरों से अधिक वार्तालाप करने का समय नही मिलेगा| जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार रहें| इस दौरान आपकी मित्र मंडली में इजाफ़ा होगा| आप उम्र या पेशे की परवाह किए बिना अधिक लोगों से मिलेंगे। आपको अपनी जीवनशैली में कुछ परिवर्तन का अनुभव हो सकता है।

केतु का प्रथम भाव में गोचरफल

केतु आपकी चंद्र राशि से प्रथम भाव में गोचर कर रहा है| यह आपके भीतर आध्यात्मिक और दार्शनिक विचारों के उच्च स्तर में वृद्धि करेगा| यह समय स्वयं का आत्मनिरीक्षण करने के लिए भी सबसे उत्तम है। हर दिन स्वयं के सुधार हेतु कुछ उत्तम समय लगाएं| इससे आप पर्याप्त आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का बेहतर सामना करने में सक्षम होंगे| आप दूसरों से दार्शनिक विचार प्राप्त करने में रुचि रखेंगे| आप चुपचाप अपने आस-पास होने वाली गतिविधियों का निरीक्षण करेंगे। आपके पास विस्मयकारी इच्छाएं नहीं होंगी लेकिन एक परिपक्व दृष्टिकोण ज़रूर होगा |

चंद्र राशि कुंभ के लिए राहु-केतु गोचर 
2019 भविष्यफल



राहु का पंचम भाव में गोचरफल

राहु आपकी राशि से पांचवें भाव में गोचर करेगा। इस गोचर के फलस्वरूप नए और सृजनात्मक विचार उत्पन्न होंगे। जो कला और लेखन से जुड़े जातकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होगी। इसके अलावा बच्चे ज्यादा शरारती और उपद्रवी हो जाएंगे और उन पर आपका नियंत्रण नहीं रहेगा। इस दौरान आप निवास स्थान बदल सकते हैं या किसी दूसरे शहर और घर में शिफ्ट हो सकते हैं। राहु के पंचम भाव में होना आपके लिए कई मामलों में लाभकारी रहेगा। कार्य स्थल पर आपको कई ऐसे अवसर मिलेंगे, जहां नए विचारों के प्रयोग से आपके कार्य सफल रहेंगे| राहु के इस गोचर की वजह से आप पर काम की अधिकता रहेगी, जिसकी वजह से मानसिक दबाव बढ़ सकता है। पारिवारिक जीवन में परेशानी आ सकती है।

केतु का एकादश भाव में गोचरफल

केतु आपके ग्यारहवें भाव में गोचर कर रहा है। यह भाव आय और सफलताओं से संबंधित है। केतु के ग्यारहवें भाव में स्थित होने से सामाजिक मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी। केतु के शुभ प्रभाव से बौद्धिक ज्ञान और धन में वृद्धि देखने को मिलेगी। इस गोचर के प्रभाव से बौद्धिक ज्ञान में और बढ़ोतरी होगी। नौकरी से ध्यान भटक सकता है। इसलिए अपनी प्रतिष्ठा को अच्छा बनाए रखने के लिए कठिन परिश्रम करने की ज़रुरत होगी। केतु के गोचर के प्रभाव से पारिवारिक जीवन में अस्थिरता बनी रहेगी। संतान का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है| आपके उनसे मतभेद भी हो सकते हैं|

चंद्र राशि मीन के लिए राहु-केतु गोचर 2019 भविष्यफल


राहु का चतुर्थ भाव में गोचरफल

राहु के चौथे भाव में गोचर करने से आपके निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप प्रभावी फैसले लेने में दिक्कत आएगी। आप छोटे-मोटे कामों और परियोजनाओं में व्यस्त रह सकते हैं। पारिवारिक जीवन में कुछ ग़लतफहमी की वजह से मतभेद हो सकते हैं। आप लक्ष्यों का निर्धारण कर कड़ी मेहनत और लगन के साथ काम करेंगे और सफलता प्राप्त करेंगे। काम के सिलसिले में या किसी और वजह से यात्रा पर जा सकते हैं। इस अवधि में आपके व्यवहार और आचरण में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन की ओर झुकाव बढ़ेगा।

केतु का दशम भाव में गोचरफल

केतु आपके दसवें भाव से गोचर कर रहा है। चूंकि दसवां भाव कार्यक्षेत्र से संंबंधित है इसलिए केतु के प्रभाव से नौकरी और काम में मन नहीं लगेगा। इसकी बजाय आपका झुकाव आध्यात्मिक और दर्शन शास्त्र का ज्ञान प्राप्त करने और उससे संबंधित पढ़ाई की ओर होगा। इसके अलावा पारिवारिक जीवन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आप पारिवारिक सदस्यों के निर्णयों से सहमत नहीं होंगे। आपकी मानसिकता प्रभावित हो सकती है जिसके चलते आप कुछ अनैतिक कार्य करने की ओर प्रवृत हो सकते हैं। इसलिए कोई भी निर्णय सोच-समझकर लें। तीर्थ यात्रा पर जाने के योग बन रहे हैं। इस दौरान आप प्राचीन मान्यताओं और विचारधारा को महत्व देंगे।

मूर्ति निर्णय | Murti Verdict

मूर्ति निर्णय की विवेचना गोचर के फलों को देखने के लिए की जाती है. इसे हम शनि, राहु अथवा बृहस्पति के लिए देख सकते हैं कि इनका गोचर व्यक्ति विशेष के लिए कैसा रहेगा? 

जब भी कोई ग्रह राशि परिवर्तन करता है तब उस समय का गोचर का चंद्रमा देखें कि कहाँ है. अब अपने जन्म चंद्रमा से गोचर के चंद्रमा की गणना करें कि वह कौन सी राशि में पड़ता है.

यदि जन्म चंद्रमा से गोचर का चंद्रमा पहली, छठी या ग्यारहवीं राशि में होता है तब स्वर्ण मूर्ति होती है. यह स्वर्ण मूर्ति सबसे अधिक शुभ परिणाम देती हैं.

यदि दूसरी, पांचवीं या नवीं राशि में हो तब रजत मूर्ति होती है. यह भी शुभ परिणाम देती है लेकिन स्वर्ण से कुछ कम होते हैं.

यदि तीसरी, सातवीं या दसवीं राशि हो तब ताम्र मूर्ति होती है.यह ज्यादा शुभ नहीं होती है.

यदि चौथी, आठवीं या बारहवीं राशि हो तब लौह मूर्ति होती है. यह मूर्ति सबसे अधिक अशुभ परिणाम देती है.


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Sunday, 17 March 2019

होली के अदभुत प्रयोग / उपाय (Holi Remedies)- आचार्य मुकेश Astro Nakshatra 27


होली की पूजा मुखयतः भगवान विष्णु (नरसिंह
अवतार) को ध्यान में रखकर की जाती है।

घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में देशी घी में
भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान
का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए। होली की ग्यारह
परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल
की आहुति देनी चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है,
कष्ट दूर होते हैं।

होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर
काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें।
यदि पहले से ही कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म
हो जाएगा।

होली दहन के समय ७ गोमती चक्र लेकर भगवान से
प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न
डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के
साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें।

होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर
उसमें थोडी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से  भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।

होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का ४० दिन तकनियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण होगी।

यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो,
तो २१ गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में
शिवलिंग पर चढा दें।

नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए
होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख
मिश्रित जल से स्नान करें।

होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें।

होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक
जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख -
समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण
होता है।

यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम
वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए।
परिणाम स्वयं देखे।

राहु का उपाय - एक नारियल का गोला लेकर उसमे
अलसी का तेल भरकर..उसी में थोडा सा गुड डाले..फिर
उस नारियल के गोले को राहू से ग्रस्त व्यक्ति अपने
शरीर के अंगो से स्पर्श करवाकर जलती हुई होलिका में
डाल दे. पुरे वर्ष भर राहू सेपरेशानी की संभावना नहीं रहेगी…

मनोकामना की पूर्ति हेतु होली के दिन से शुरू करके
प्रतिदिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं,
मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।

होली की प्रातः बेलपत्र पर सफेद चंदन
की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए
शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। बाद में सोमवार
को किसी मंदिर में भोलेनाथ को पंचमेवा की खीर
अवश्य चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होगी।

स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त
रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले
तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं
और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस
को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से
रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।

व्यापार लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले
पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक
सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से
बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा।

होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल
की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर दूकान में
या व्यापार स्थल पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक
का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ में
दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।

धनहानि से बचाव के लिए होली के दिन मुखय द्वार पर
गुलाल छिड़कें और उस पर द्विमुखी दीपक जलाएं। दीपक
जलाते समय धनहानि से बचाव की कामना करें। जब
दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह
क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि से बचाव होगा।

दुर्घटना से बचाव के लिए होलिका दहन से पूर्व पांच
काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर
अंत में होलिका की ओर पीठ करके पांचों गुन्जाओं
को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से
होली में फेंक दें।

होली के दिन प्रातः उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से
कोई वस्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रुमाल
नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से
पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय
सावधानीपूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा।
आत्मरक्षा हेतु किसी को कष्ट न पहुंचाएं,
किसी का बुरा न करें और न सोचें।
आपकी रक्षा होगी।

अगर आपके घर में कोई शारीरिक कष्टों से पीड़ित है -
ओर उसको रोग छोड़ नहीं रहे है - तो 11 अभिमंत्रित
गोमती चक्र बीमार ब्यक्ति के शरीर से 21 बार उसार
कर होली की अग्नि में डाल दे शारीरिक कष्टों से
शीघ्र मुक्ति मिल जायेगी

अगर बुध ग्रह आपकी कुंडली में संतान प्राप्ति में
बाधा डाल रहा है तो किसी भी बच्चे वाली गरीब
महिला को होली वाले दिन से शुरु कर एक महीने तक
हरी-सब्जियाँ दें। माता वैष्णो-देवी से संतान
की प्रार्थना करें।

शीघ्र विवाह हेतु: जो युवा विवाह योग्य हैं और सर्वगुण
संपन्न हैं, फिर भी शादी नहीं हो पा रही है तो यह
उपाय करें। होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और
अपने साथ 1 साबूत पान, 1 साबूत सुपारी एवं
हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और
हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके
बाद पीछे देखें बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग
अगले दिन भी करें। इसके साथ ही समय-समय शुभ मुहूर्त में
यह उपाय किया जा सकता है। जल्दी ही विवाह के
योग बन जाएंगे।

18 मार्च 2019 सोमवार का पंचांग, फाल्गुन शुक्ल पक्ष, द्वादशी, दैनिक पञ्चाङ्ग: Acharya Mukesh/ ASTRO NAKSHATRA 27


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।
शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।

योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

18 मार्च 2019 सोमवार का पंचांग
🌞↗️सूर्योदय - 06:32
🌞↘️सूर्यास्त - 18:27
🌕↗️चन्द्रोदय 15:34
🌘↘️चन्द्रास्त - 29:17+

पञ्चाङ्ग
🔘वार-  सोमवार 💠तिथि- शुक्ल पक्ष
द्वादशी - 17:43 तक
त्रयोदशी

नक्षत्र

अश्लेशा - 21:47 तक
                                                                                             
मघा

योग
सुकर्मा - 21:19 तक
धृति

करण
बव - 07:20 तक
बालव - 17:43 तक
कौलव - 28:02+ तक
तैतिल

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:-वसन्त       द्रिक ऋतु:-वसन्त

मास - फाल्गुन माह

सूर्य राशि 
मीन

चन्द्र राशि 
कर्क - 21:47 तक
सिंह


सूर्य नक्षत्र

पूर्व भाद्रपद - 14:16 तक
उत्तर भाद्रपद


🌅दिनमान
11 घण्टे 55 मिनट्स 19 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
12 घण्टे 03 मिनट्स 31 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏
👉अभिजित मुहूर्त: 12:06 से 12:53
👉विजय मुहूर्त:-14:29 से 15:16
👉अमृत काल:- 20:21 से 21:47
👏ब्रह्म मुहूर्त:- 28:54+ से 29:42+

⛔अशुभ समय⛔
👿गुलिक काल:-13:59 से 15:28
🚷यमगण्ड:-
11:00 से 12:29
👹राहुकाल:- 08:01 से 09:31

ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।

रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- शनि
अग्निवास :-पृथ्वी
दिशाशूल (Dishashool) - पूर्व


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~मीन♒03⁰.35'
🌙चंद्र-राशि~ ♋कर्क-29⁰.59'- 21:47 तक, ♌सिंह
🔺मंगल ~ मेष ♈ 27⁰.31'
↺🔘बुध~ कुम्भ ♒ (अस्त ,वक्री  )26⁰.43'
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏29⁰.23'
◽शुक्र ~ मकर♑26⁰.01'
◾शनि~धनु♐ 24⁰.57'
↺👹राहु ~ मिथुन ♊29⁰.22'
↺👺केतु ~ धनु♐ 29⁰.22'

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।           
 💛ACHARYA MUKESH,

Saturday, 16 March 2019

दैनिक पञ्चाङ्ग : 17 मार्च 2019 रविवार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष, एकादशी/ ASTRO NAKSHATRA 27 / ACHARYA MUKESH


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।
शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।

योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

17 मार्च 2019 रविवार का पंचांग
🌞↗️सूर्योदय - 06:33
🌞↘️सूर्यास्त - 18:27
🌕↗️चन्द्रोदय 14:27
🌘↘️चन्द्रास्त - 28:27+

पञ्चाङ्ग
🔘वार-  रविवार 💠तिथि- शुक्ल पक्ष
एकादशी - 20:51 तक
द्वादशी


नक्षत्र
पुष्य - 24:12+ तक
अश्लेशा

योग
अतिगण्ड - 25:06+ तक
सुकर्मा

करण
वणिज - 10:15 तक
विष्टि - 20:51 तक
बव

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:-वसन्त       द्रिक ऋतु:-वसन्त

मास - फाल्गुन माह

सूर्य राशि 
मीन

चन्द्र राशि 

कर्क


सूर्य नक्षत्र

पूर्व भाद्रपद


🌅दिनमान
11 घण्टे 53 मिनट्स 35 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
12 घण्टे 05 मिनट्स 14 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏
👉सर्वार्थ सिद्धि योग :- 06:33 से 24:12+👉अभिजित मुहूर्त: 12:07 से 12:54
👉विजय मुहूर्त:-14:29 से 15:16
👉अमृत काल:- 18:21 से 19:49
👏रवि पुष्य योग:- 06:33 से 24:12+
👏ब्रह्म मुहूर्त:- 28:56+ से 29:44+

⛔अशुभ समय⛔
👿गुलिक काल:- 15:28 से 16:57
🚷यमगण्ड:-
12:30 से 13:59
👹राहुकाल:- 16:57 से 18:27
🚫भद्रा :- 10:15 से 20:51

ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।

रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- शनि
अग्निवास :-आकाश - 20:51 तक
पाताल
दिशाशूल (Dishashool) - पश्चिम


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~मीन♒02⁰.39'
🌙चंद्र-राशि~ ♋कर्क-15⁰.22'
🔺मंगल ~ मेष ♈ 26⁰.51'
↺🔘बुध~ कुम्भ ♒ (अस्त ,वक्री  )27⁰.34'
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏29⁰.19'
◽शुक्र ~ मकर♑24⁰.54'
◾शनि~धनु♐ 24⁰.53'
↺👹राहु ~ मिथुन ♊29⁰.25'
↺👺केतु ~ धनु♐ 29⁰.25'

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।           
 💛ACHARYA MUKESH,