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Acharya Mukesh

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

Acharya Mukesh...Astro Nakshatra 27

“कुछ अलग करना है, तो भीड़ से हट कर चलो, भीड़ साहस तो देती है, पर पहचान छिन लेती है।”

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Thursday, 14 March 2019

15 मार्च 2019 शुक्रवार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष, नवमी, मीन संक्रान्ति, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग/ दैनिक पञ्चाङ्ग


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।
शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।

योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

15 मार्च 2019 शुक्रवार का पंचांग

🌞↗️सूर्योदय - 06:35
🌞↘️सूर्यास्त - 18:25
🌕↗️चन्द्रोदय 12:23
🌘↘️चन्द्रास्त - 26:37+

पञ्चाङ्ग
🔘वार-  शुक्रवार 💠तिथि- शुक्ल पक्ष
नवमी - 25:44+ तक
दशमी

नक्षत्र
आर्द्रा

योग
आयुष्मान् - 10:13 तक
सौभाग्य

करण
बालव - 14:37 तक
कौलव - 25:44+ तक
तैतिल


विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:-वसन्तद्रिक ऋतु:-वसन्त

मास - फाल्गुन माह

सूर्य राशि 
कुम्भ

चन्द्र राशि 
मिथुन


सूर्य नक्षत्र

पूर्व भाद्रपद


🌅दिनमान
11 घण्टे 50 मिनट्स 08 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
12 घण्टे 08 मिनट्स 42 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏
👉सर्वार्थ सिद्धि योग:- 27:45+ से 30:34+
👉अभिजित मुहूर्त: 12:07 से 12:54
👉विजय मुहूर्त:-14:29 से 15:16
👉अमृत काल:- 18:09 से 19:41
👏ब्रह्म मुहूर्त:- 28:57+ से 29:45+

⛔अशुभ समय⛔
👿गुलिक काल:-08:04 से 09:33
🚷यमगण्ड:-
15:28 से 16:57
👹राहुकाल:- 11:02 से 12:30

ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।

रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- शुक्र - 27:45+ तक
शनि
अग्निवास :- पृथ्वी - 25:44+ तक
आकाश
दिशाशूल (Dishashool) - पश्चिम


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~मीन♒00⁰.42'
🌙चंद्र-राशि~ मिथुन ♊17⁰.08'
🔺मंगल ~ मेष ♈ 25⁰.32'
↺🔘बुध~ कुम्भ ♒ (अस्त ,वक्री  )29⁰.26'
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏29⁰.10'
◽शुक्र ~ मकर♑22⁰.33'
◾शनि~धनु♐ 24⁰.45'
↺👹राहु ~ मिथुन ♊29⁰.31'
↺👺केतु ~ धनु♐ 29⁰.31'

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।           
 💛ACHARYA MUKESH,

Wednesday, 13 March 2019

14 मार्च 2019 बृहस्पतिवार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष, अष्टमी का पंचांग/ दैनिक पञ्चाङ्ग


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।
शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।

योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

14 मार्च 2019 बृहस्पतिवार का पंचांग

🌞↗️सूर्योदय - 06:36
🌞↘️सूर्यास्त - 18:25
🌕↗️चन्द्रोदय 11:30
🌘↘️चन्द्रास्त - 25:37+

पञ्चाङ्ग
🔘वार-  बृहस्पतिवार 💠तिथि- शुक्ल पक्ष
अष्टमी

नक्षत्र
मॄगशिरा - 28:43+ तक
आर्द्रा

योग
प्रीति - 12:21 तक
आयुष्मान्

करण
विष्टि - 15:57 तक{भद्रा}
बव - 27:21+ तक
बालव


विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:-शिशिर

द्रिक ऋतु:-वसन्त

मास - फाल्गुन माह

सूर्य राशि 
कुम्भ

चन्द्र राशि 



वृषभ - 16:58 तक
मिथुन


सूर्य नक्षत्र

पूर्व भाद्रपद


🌅दिनमान
11 घण्टे 48 मिनट्स 25 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
12 घण्टे 10 मिनट्स 26 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏

👉अभिजित मुहूर्त: 12:07 से 12:54
👉विजय मुहूर्त:-14:29 से 15:16
👉अमृत काल:- 20:03 से 21:38
👏ब्रह्म मुहूर्त:-28:58+ से 29:47+

⛔अशुभ समय⛔
👿गुलिक काल:-09:33 से 11:02
🚷यमगण्ड:-
06:36 से 08:05
👹राहुकाल:- 13:59 से 15:28
ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।

रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- शुक्र
अग्निवास :-पाताल - 27:21+ तक
पृथ्वी
भद्रावास :- स्वर्ग - 15:57 तक

दिशाशूल (Dishashool) - दक्षिण


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~कुम्भ♒29⁰.46'
🌙चंद्र-राशि~ मिथुन ♊4⁰.11'
🔺मंगल ~ मेष ♈ 24⁰.54'
↺🔘बुध~ मीन (नीच, अस्त ,वक्री  )00⁰.19'
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏29⁰.06'
◽शुक्र ~ मकर♑21⁰.26'
◾शनि~धनु♐ 24⁰.41'
↺👹राहु ~ मिथुन ♊29⁰.34'
↺👺केतु ~ धनु♐ 29⁰.34'

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।           
 💛ACHARYA MUKESH,

Holi 2019, Holashtak: 14 मार्च से शुरू हो रहा है होलाष्टक और खरमास, भूल से न करें कोई शुभ काम ! -ACHARYA MUKESH


हिंदू धर्म शास्त्रों में होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ काम शुरू करने की मनाही है. इसे अशुभ मुहूर्त माना गया है !

होली का त्योहार इस बार 21 मार्च को मनाया जाएगा और 20 मार्च को होलिका दहन है. होली से 8 दिन पूर्व ही होलाष्टक लग जाते हैं. फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक माना जाता है. होलाष्टक 14 मार्च से लगेंगे जोकि 21 मार्च यानी कि होली के दिन तक रहेंगे. हिंदू धर्म शास्त्रों में होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ काम शुरू करने की मनाही है. इसे अशुभ मुहूर्त माना गया है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष नवमी के दिन सूर्योदय से पहले सूर्यदेव मीन राशि में प्रवेश करेंगे. अगर ज्योतिषशास्त्र के आधार पर इसकी गणना की जाए तो संक्रांति 14 मार्च को होगी, लेकिन चूंकि पुण्यकाल 15 मार्च से माना जा रहा है. इसलिए इसी दिन से खरमास शुरू माना जाएगा.

होलाष्टक में कौन-कौन से काम न करें:


# पति-पत्नी को होलाष्टक के दिनों में संयम रखना चाहिए। इस दौरान बने संबंध से पैदा होने वाली संतान को जीवनभर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 


# अगर आप महालक्ष्मी की कृपा पाना चाहते हैं तो होली तक घर में शांति बनाए रखें। किसी भी प्रकार का वाद-विवाद न करें। अन्यथा होली पर की गई पूजा से शुभ फल नहीं मिल पाएंगे।


# इन दिनों में सुबह देर तक सोने से बचना चाहिए। सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इस बात का ध्यान नहीं रखेंगे तो आलस्य बढ़ेगा और देवी-देवता की कृपा नहीं मिल पाएगी।

हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, होलकाष्टक के दौरान प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह मंद हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा चरम पर होती है. इसलिए इस दौरान शुभ कामों को निषेध बताया गया है.
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होलाष्टक जुड़ी विशेष बातें
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इसलिए माना जाता है अशुभ 

मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद की नारायण भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने होली से पहले आठ दिनों में उन्हें कई तरह के कष्ट दिए थे। तभी से इन आठ दिनों को हमारे हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है। इन 8 दिनों में ग्रह अपना स्थान बदलते हैं। ग्रहों के बदलाव की वजह से होलाष्टक के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। 
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क्या करें ?
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शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दिनों में जो व्रत किए जाते हैं उनसे भगवान प्रसन्न होते हैं। अगर व्रत नहीं कर सकते तो इस समय में दान देना चाहिए।
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क्या न करें ?
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शुभ कार्य करने की मनाही होती है। इस समय में विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण, नामकरण आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं। नए काम भी शुरू नहीं किए जाते।
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क्यों है मनाही ?
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दिनों में जो कार्य किए जाते हैं उनसे जीवन कष्ट और पीड़ा आती है। इन दिनों में यदि विवाह आदि किए जाते हैं तो भविष्य में संबंध विच्छेद, कलह का शिकार होते हैं।
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ASTRO NAKSHATRA 27
ACHARYA MUKESH


Tuesday, 12 March 2019

13 मार्च 2019 बुधवार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष, सप्तमी / आज का पंचांग (AAJ KA PANCHANG)


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।
शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।

योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

13 मार्च 2019   बुधवार का पंचांग

🌞↗️सूर्योदय - 06:37
🌞↘️सूर्यास्त - 18:24
🌕↗️चन्द्रोदय 10:43
🌘↘️चन्द्रास्त - 24:37

पञ्चाङ्ग
🔘वार-  बुधवार 💠तिथि- शुक्ल पक्ष
सप्तमी - 28:23+ तक
अष्टमी

तिथि का स्वामी -  सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्यदेव जी है ।

नक्षत्र
रोहिणी

योग
विष्कम्भ - 14:01 तक
प्रीति

करण
गर - 16:41 तक
वणिज - 28:23+ तक
विष्टि{भद्रा}


विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:-शिशिर

द्रिक ऋतु:-वसन्त

मास - फाल्गुन माह

सूर्य राशि 
कुम्भ

चन्द्र राशि 


वृषभ


सूर्य नक्षत्र

पूर्व भाद्रपद


🌅दिनमान
11 घण्टे 46 मिनट्स 41 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
12 घण्टे 12 मिनट्स 10 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏

👉अभिजित मुहूर्त: कोई नहीं
👉सर्वार्थ सिद्धि योग:-पूरे दिन
👉विजय मुहूर्त:-14:29 से 15:16
👉अमृत काल:25:52+ से 27:29+
👏ब्रह्म मुहूर्त:-28:59+ से 29:48+

⛔अशुभ समय⛔
👿गुलिक काल:-11:02 से 12:31
🚷यमगण्ड:-
08:06 से 09:34
👹राहुकाल:- 12:31 से 13:59
ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।

रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- शुक्र
अग्निवास :-पृथ्वी
भद्रावास :- स्वर्ग से 28:23+ से पूर्ण रात्रि

दिशाशूल (Dishashool) -उत्तर


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~कुम्भ♒28⁰.42'
🌙चंद्र-राशि~ वृषभ♉19⁰.48'
🔺मंगल ~ मेष ♈ 24⁰.12'
↺🔘बुध~ मीन (नीच, अस्त ,वक्री  )1⁰.19'
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏29⁰.01'
◽शुक्र ~ मकर♑20⁰.09'
◾शनि~धनु♐ 24⁰.37'
↺👹राहु ~ मिथुन ♊29⁰.38'
↺👺केतु ~ धनु♐ 29⁰.38'

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।           
 💛ACHARYA MUKESH,