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Acharya Mukesh

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

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“कुछ अलग करना है, तो भीड़ से हट कर चलो, भीड़ साहस तो देती है, पर पहचान छिन लेती है।”

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Tuesday, 29 January 2019

शुक्र का धनु राशि में गोचर - क्या होगा १२ राशियों पर इसका प्रभाव ? शुक्र गोचर / 29 जनवरी 2019


शुक्र जिसे अंग्रेजी में वीनस यानि सुंदरता की देवी  कहा जाता है। जिसे ज्योतिष में स्त्री ग्रह भी माना जाता है। जो वृषभ व तुला राशियों के स्वामी हैं। जिन्हें दैत्यगुरु भी माना जाता है। जो जातक की कुंडली में विवाह से लेकर संतान तक के योग बनाते हैं। लाभ का कारक भी शुक्र को माना जाता है। जीवन में सुख-समृद्धि भी शुक्र के शुभ प्रभाव से आती है। शुक्र जातक में कला के प्रति आकर्षण पैदा करते हैं। कलात्मकता का विकास करते हैं। शुक्र का जातक की कुंडली में कमजोर या मजबूत होना बहुत मायने रखता है मीन राशि में शुक्र उच्च के होते हैं तो कन्या राशि में इन्हें नीच का माना जाता है। शुक्र जो सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद आकाश में अपनी चमक से एक विशेष पहचान रखते हैं। शनि, बुध व केतु के साथ इनकी मित्रता है तो सूर्य, चंद्रमा व राहू के साथ इनका शत्रुवत संबंध है। मंगल व बृहस्पति के साथ इनका संबंध सामान्य है। शुक्र ही वह ग्रह हैं जिन्हें हम भोर का तारा कहते हैं। शुक्र का राशि परिवर्तन करना ज्योतिष शास्त्र के नज़रिये से एक अहम गतिविधि है।


29 जनवरी को 23 बजकर 42 मिनट पर शुक्र वृश्चिक राशि से परिवर्तन कर धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। जहां पर शनि के साथ सूर्य पहले से ही गोचर कर रहे हैं। कुल मिलाकर शुक्र का यह गोचर परिवरिवर्तन त्रीग्रही योग बना रहा है। राशिनुसार शुक्र आपको कैसे प्रभावित करेंगें आइये जानते हैं।



मेष – आपकी राशि से शुक्र का परिवर्तन नवम भाव में हो रहा है। आपके लिये यह समय भाग्योन्नति के संकेत कर रहा है। भाग्य स्थान में शुक्र शनि व सूर्य के साथ गोचर करेंगें। कार्यक्षेत्र में आपके लिये उन्नति के योग हैं, वैवाहिक जीवन भी काफी अच्छा बीतेगा। भाई बहनों का भी आपको पूर्ण सहयोग मिल सकता है। धार्मिक कार्यों के प्रति भी आपका रूझान बढ़ने के आसार हैं। रोमांटिक जीवन की बात करें तो संबंधों में स्थिरता रहने के आसार हैं। इस गोचर के दौरान आप दोस्तों और करीबियों के साथ एक सुखमय समय व्यतीत कर पाएंगे।

वृषभ – वृषभ राशि के स्वामी स्वयं शुक्र हैं जो आपकी राशि से अष्टम भाव में प्रवेश करेंगें। अष्टम भाव में शनि व सूर्य के साथ गोचर करने से यह समय आपके लिये छोटी यात्राओं के योग बना रहा है। हालांकि शारीरिक तौर पर आपको कष्ट उठाने पड़ सकते हैं। स्वास्थ्य भी थोड़ा ढ़ीला रहने के आसार हैं। शत्रु पक्ष भी आप पर हावि रह सकता है। प्रतिस्पर्धियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर आपको इस समय थोड़ा संभलकर रहने की आवश्यकता रहेगी।

मिथुन – आपकी राशि से शुक्र सप्तम भाव में शनि व सूर्य के साथ गोचररत हो रहे हैं। यह समय आपके लिये दांपत्य जीवन में स्थिरता लाने वाला रहने के आसार हैं। जो अविवाहित जातक परिणय सूत्र में बंधने के इच्छुक हैं उन्हें इसके लिये थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है लेकिन उनके विवाह संबंधी बात जरूर आगे बढ़ सकती है। आपके लिये कोई अच्छा रिश्ता आ सकता है। हालांकि अविवाहित प्रेमी युगलों में आपसी तालमेल में कमी आ सकती है। साथी की नाराज़गी भी झेलनी पड़ सकती है। जो जातक किसी के प्रेमपाश में बंधना चाहते हैं उनके लिये प्रेम के योग बन रहे हैं। शारीरिक सुख के साथ-साथ मानसिक शांति आपको मिल सकती है।

कर्क – कर्क राशि वालों के लिये शुक्र राशि से छठे स्थान में प्रवेश कर रहे हैं जहां पर शनि के साथ सूर्य पहले से ही गोचररत हैं। आपके लिये यह परिवर्तन सौभाग्यशाली कहा जा सकता है। विशेषकर व्यवसायी एवं विद्यार्थियों के लिये अपने प्रतिस्पर्धियों पर विजय पाने के योग बन रहे हैं। आपकी सेहत में भी सुधार महसूस कर सकते हैं। यात्रा के योग भी इस दौरान आपके लिये बन सकते हैं। धन लाभ के संकेत भी हैं। हालांकि बावजूद इन तमाम सकारात्मक पहलुओं के आपको सुख का अभाव हो सकता है, माता के लिये यह समय कष्टकारी रह सकता है.


सिंह – आपकी राशि से शुक्र पंचम भाव में गोचर करेंगें। शनि व सूर्य के साथ शुक्र के आने से यह समय आपके लिये लाभकारी रहने के आसार हैं। विशेषकर जो जातक किसी तरह की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं या फिर कहीं साक्षात्कार दे रहे हैं तो उन्हें सफलता मिलने के आसार हैं। संतान पक्ष की ओर से भी आप संतुष्ट रह सकते हैं। रोमांटिक जीवन भी इस समय सुखद रहने के आसार हैं। कार्यक्षेत्र में उन्नति की उम्मीद भी कर सकते हैं। हालांकि एक अंजान सा भय भी आपको सता सकता है।

कन्या – कन्या जातकों के लिये शुक्र का परिवर्तन सुखभाव मे हो रहा है जहां शनि के साथ सूर्य गोचर कर रहे हैं। इस समय आपके सुख में वृद्धि होने के आसार हैं। यदि लंबे समय से मकान या वाहन की खरीददारी का विचार बना रहे हैं तो आपको सफलता मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में भी आपके लिये उन्नति के योग बन रहे हैं। भाग्य का भी आपको पूरा साथ मिलेगा। हालांकि इस दौरान आपके खर्चों में भी बढ़ोतरी होने के आसार हैं।

तुला – शुक्र के धनु राशि में गोचर के दौरान ये आपकी राशि के तीसरे भाव में विराजमान होगा। आपकी राशि में शुक्र की ये स्थिति आपके लिए शुभ फलदायी सिद्ध होगी। इस समय आपका सारा ध्यान अपने लक्ष्य प्राप्ति पर होगा। आपके बोल चाल की शैली में बदलाव आएगा और आप अपने भाई बहनों के साथ एक खुशगवार वक़्त व्यतीत कर सकेंगे। इस दौरान आप नए लोगों के साथ संपर्क में आएंगे और आपके नए मित्र भी बनेंगे। लिहाजा आपके सामाजिक स्तर में वृद्धि होगी और आप में एक सकारात्मकता आएगी। इस अवधि के दौरान आप किसी अनचाही यात्रा पर भी जा सकते हैं, लेकिन ये यात्रा आपके लिए खासी लाभदायक साबित होगी। दूसरी तरफ आपका रूझान धार्मिक कार्यों के तरफ भी होगा। स्वास्थ्य के आधार पर देखा जाए तो गोचर की इस अवधि के दौरान आपको अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कार्यक्षेत्र में बॉस के साथ अच्छे संबंध बनेंगे और आपके काम की सराहना होगी। यदि आप किसी नए व्यापार की शुरुआत करना चाहते हैं तो उसके लिए भी ये समय उत्तम है।

वृश्चिक – आपकी राशि से शुक्र दूसरे भाव में आ रहे हैं। धन भाव में शुक्र के आने से इस समय आपके लिये धन वृद्धि के योग बन रहे हैं। लंबे समय से यदि किसी बिमारी से परेशान हैं तो निजात मिलने की प्रबल संभावनाएं हैं। हालांकि दांपत्य जीवन में आपको थोड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है आपको रिश्तों में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अविवाहित जातकों का रोमांटिक जीवन अच्छा रहने के आसार हैं साथी के साथ आपके संबंध मधुर रहने की उम्मीद कर सकते हैं। आपको धन प्राप्ति तो होगी लेकिन साथ ही खर्च भी बढ़ सकते हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर बनाये रखने के लिये खर्चों पर नियंत्रण कर संतुलन बनाये रखने का प्रयास करें।

धनु – शुक्र आपकी ही राशि में प्रवेश कर रहे हैं। यह समय स्वास्थ्य के मामले में आपके लिये सौभाग्यशाली कहा जा सकता है। इस दौरान आपकी मुलाकात कुछ पुराने मित्रों से भी हो सकती है जिससे आपको काफी खुशी मिलेगी। व्यवसायी जातकों के लिये प्रतिस्पर्धी चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। इस दौरान आपके लिये यात्रा के योग भी बनेंगे जो कि आपके लिये लाभकारी रह सकती हैं। पैतृक संपत्ति से भी आपको लाभ मिलने के आसार हैं। जो मित्र, दोस्त, सगे-संबंधि दूर रहते हैं उनसे लाभ मिल सकता है।

मकर – आपकी राशि से शुक्र का 12वें स्थान में गोचररत हो रहे हैं। इस दौरान कामकाजी जीवन के लिये समय लाभकारी रहने के आसार हैं। साक्षात्कार एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। प्रेम जीवन भी अच्छा रहने की उम्मीद कर सकते हैं। विवाहित दंपति संतान संबंधी खुशखबरी पा सकते हैं। इस समय आपके प्रतिद्वंदि भी कमजोर प्रतीत होंगे। कुल मिलाकर शुक्र का यह राशि परिवर्तन आपके लिये शुभ कहा जा सकता है। हालांकि गोचर की इस अवधि के दौरान आपकी आय के नए मार्ग भी बनेंगे। इस समय आप भौतिक वस्तुओं का लाभ भी उठा पाएंगे। लेकिन शुक्र के आपकी राशि से बारहवें भाव में विराजमान होने की वजह से आपको धन की हानि प्रभावपूर्ण तरीके से हो सकती है। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ छोटे-मोटे टकराव होने की संभावना है। इस समय जीवनसाथी के साथ वाद-विवाद की स्थिति से बचें क्योंकि इससे दोनों के बीच झगड़े बढ़ सकते हैं जो आपके रिश्ते के लिए हानिकारक होगा।

कुंभ – कुंभ राशि वालों के लिये लाभ का कारक माने जाने वाले शुक्र लाभ स्थान में ही प्रवेश कर रहे हैं। लेकिन लाभ घर में ही शनि व सूर्य के गोचर करने से लाभ में कमी के संकेत हैं। भाग्य का साथ भी आपको हो सकता है अपेक्षाकृत कम मिले। माता-पिता की ओर से आपको सुख का अनुभव हो सकता है। भौतिक सुख तो आपको मिलेगा लेकिन हो सकता है आप आत्मिक तौर पर संतुष्टि महसूस न करें। जिन कार्यों से आपको लाभ प्राप्ति की अपेक्षा है उनमें विलंब हो सकता है। बड़े बुजूर्गों से आपको सहयोग मिल सकता है।

मीन – इस गोचर के दौरान शुक्र आपकी राशि के दसवें भाव में विराजमान होगा। ये समय आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आएगा। जहाँ एक तरफ कार्यक्षेत्र में आपको विभिन्न प्रकार के उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं वहीं दूसरी तरफ बिजनेस से जुड़े लोगों को इस दौरान ख़ासा लाभ मिल सकता है। यदि आप अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने की सोच रहे हैं तो, ये समय आपके लिए सबसे ज्यादा उत्तम है। दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार रखें और बोलचाल में अप-शब्दों का प्रयोग ना करें। ऐसा करना आपकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। इस समय आपको अपने दुश्मनों से बचकर रहने की आवश्यकता है क्योंकि इस वक़्त वो आप पर हावी रहेंगे। परिवार में छोटे भाई-बहनों के साथ मतभेद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इस वक्त आपको अपने आप पर संयम रखने की आवश्यकता है और साथ ही इस दौरान अपनी वाणी में मधुरता बनाए रखना आपके लिए बेहतर होगा। जमीन जायदाद और प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई मसला इस समय परिवार में विवाद का कारण बन सकता है। जीवनसाथी के साथ अच्छा व्यवहार आपके वैवाहिक जीवन में खुशियों का संचार करेगा और आप एक दूसरे के साथ रोमांटिक पल गुजार सकेंगे। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखें तो गोचर की इस अवधि के दौरान आपको अपनी सेहत का ख़ास ख्याल रखने की आवश्यकता है। अस्थमा के रोगियों को इस दौरान ख़ासा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


ACHARYA MUKESH
ASTRO NAKSHATRA 27

Monday, 28 January 2019

29जनवरी 2019 मंगलवार का पंचांग, माघ कृष्ण पक्ष, नवमी, पंचांग, Aaj Ka Panchang, आज का पंचांग,

www.astronakshatra27.com

हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।
शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।

योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

29 जनवरी 2019
मंगलवार का पंचांग

🌞↗️सूर्योदय - 07:15 🌞↘️सूर्यास्त - 17:53 
🌕↗️चन्द्रोदय - 26:32+🌘↘️चन्द्रास्त - 12:55

पञ्चाङ्ग
🔘वार- मंगलवार 💠तिथि -  कृष्ण पक्ष (माघ)
नवमी - 14:41 तक
दशमी

तिथि का स्वामी - 
नवमी तिथि के स्वामी दुर्गा जी है तथा दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है ।
नवमी तिथि की स्वामिनी माँ दुर्गा हैं। नवमी तिथि को दुर्गा माता का पूजन किया जाना बहुत शुभ रहता है। नवमी तिथि में माँ दुर्गा को गुड़हल या लाल गुलाब अर्पित करते हुए दुर्गा जी के किसी भी सिद्द मन्त्र का जाप करने से जीवन के सभी मनोरथ पूर्ण होते है । नवमी तिथि को उग्रा कहा गया है और यह एक रिक्ता तिथि भी है इसलिए नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत इस तिथि में किए जाना शास्त्रों में शुभ नहीं माना जाता है। नवमी तिथि में लौकी और कद्दू का सेवन नहीं करें। नवमी तिथि में वाद विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण , मद्यपान आदि सभी प्रकार के क्रूर कर्म किए जाते हैं।

नक्षत्र
विशाखा - 15:15 तक
अनुराधा
नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :-विशाखा नक्षत्र के देवता इन्द्र और अग्नि है एवं अनुराधा नक्षत्र के देवता मित्र है ।

योग
वृद्धि - 29:48+ तक
ध्रुव

करण
गर - 14:41 तक
वणिज - 27:02+ तक
विष्टि(भद्रा )

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:-शिशिर

द्रिक ऋतु:-शिशिर

मास - माघ माह

सूर्य राशि 

मकर

चन्द्र राशि
तुला - 09:00 तक
वृश्चिक

सूर्य नक्षत्र

श्रवण

🌅दिनमान
10 घण्टे 38 मिनट्स 20 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
13 घण्टे 21 मिनट्स 10 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏

अभिजित मुहूर्त
12:13 से 12:56
अमृत काल
29:40+ से 31:21+
विजय मुहूर्त
14:21 से 15:03

⛔अशुभ समय⛔

🚫गुलिक काल
12:34 से 13:54
🚷यमगण्ड
09:55 से 11:15
👹राहुकाल
15:14 से 16:34
😈दुर्मुहूर्त
09:23 से 10:05
23:14 से 24:07+
😡वर्ज्य
19:29 से 21:11
भद्रा
27:02+ से 31:15+

ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।
रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- राहु
🔥अग्निवास :-
पृथ्वी - 14:41 तक
आकाश
भद्रावास
स्वर्ग से 27:02+ से पूर्ण रात्रि

पातालदिशाशूल (Dishashool)- उत्तर


मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है । सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।

विशेष - नवमी को लौकी नहीं खानी चाहिए ।

पर्व त्यौहार :- 

मुहूर्त - नवमी रिक्ता तिथि है इसलिए इस दिन कोई भी नया, मांगलिक कार्य वर्जित है ।


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~मकर♑
🌙चंद्र-राशि~♎तुला- 09:00 तक,वृश्चिक♏
🔺मंगल ~ मीन♓
🔘बुध(अस्त⬇️)~ मकर♑
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏
◽शुक्र ~ वृश्चिक♏
◾शनि~धनु♐ 
👹राहु ~ कर्क♋
👺केतु ~ मकर♑

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।
                                       
                  
 💛ACHARYA MUKESH,

Saturday, 26 January 2019

27 जनवरी 2019 रविवार/ माघ कृष्ण पक्ष, सप्तमी/ पंचांग | Panchang | रविवार का पंचांग | Raviwar Ka Panchang | आज का पंचांग | Aaj Ka Panchang |


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।

शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।
योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

27 जनवरी 2019 रविवार का पंचांग 

🌞↗️सूर्योदय - 07:16  🌞↘️सूर्यास्त - 17:52 
🌕↗️चन्द्रोदय - 24:37+🌘↘️चन्द्रास्त - 11:39

पञ्चाङ्ग
🔘वार- रविवार  💠तिथि -  कृष्ण पक्ष (माघ)

 सप्तमी - 15:02 तक
अष्टमी

तिथि का स्वामी -सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्यदेव जी है तथा अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी है।

सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य है। सूर्य देव इस संसार प्रत्यक्ष देव है जो अपनी किरणों, अपने प्रकाश से इस ब्रह्माण्ड को आलोकिक करते है। सप्तमी तिथि को भगवान सूर्यदेव का जन्मदिन माना जाता है और इसी दिन सूर्य देव अपनी पत्नी संज्ञा से दोबारा मिले थे इसके कारण यह तिथि सूर्य भगवान को बहुत प्रिय है। कार्यों में सफलता, विद्द्या, तेज, मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए सप्तमी तिथि को सूर्य देव का पूजन अवश्य ही किया जाना चाहिए। सप्तमी के दिन मीठा भोजन या फलाहार करने भोजन में नमक का सेवन ना करने से सूर्य भगवान प्रसन्न होते हैं ।

रविवार को अदरक और मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए।

नक्षत्र
चित्रा - 14:25 तक
स्वाती

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :- चित्रा नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा है एवं स्वाती नक्षत्र के देवता समीर है.

योग
धृति - 09:30 तक
शूल

करण
बव - 15:02 तक
बालव - 26:40+ तक
कौलव

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:-शिशिर

द्रिक ऋतु:-शिशिर

मास - माघ माह

सूर्य राशि 

मकर

चन्द्र राशि
तुला

सूर्य नक्षत्र

श्रवण

🌅दिनमान
10 घण्टे 35 मिनट्स 45 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
13 घण्टे 23 मिनट्स 48 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏

अभिजित मुहूर्त
12:13 से 12:55
अमृत काल
08:12 से 09:45
29:39+ से 31:16+
विजय मुहूर्त
14:20 से 15:02
द्विपुष्कर योग
07:16 से 14:25

⛔अशुभ समय⛔

🚫गुलिक काल
15:13 से 16:32
🚷यमगण्ड
12:34 से 13:53
👹राहुकाल
16:32 से 17:52
😈दुर्मुहूर्त
16:27 से 17:09
😡वर्ज्य
20:02 से 21:38
ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।
रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- गुरु
🔥अग्निवास :-
पृथ्वी - 15:02 तक
आकाश
पातालदिशाशूल (Dishashool)- पश्चिम


रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । इस दिन यात्रा में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।

विशेष - सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए ।

पर्व त्यौहार -

मुहूर्त - सप्तमी को राज संबंधी कार्य ( सरकारी कार्य ), व्रतबंध, प्रतिष्ठा, विवाह, यात्रा, भूषणादि के लिए शुभ होते हैं।


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~मकर♑
🌙चंद्र-राशि~♎तुला
🔺मंगल ~ मीन♓
🔘बुध(अस्त⬇️)~ मकर♑
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏
◽शुक्र ~ वृश्चिक♏
◾शनि~धनु♐ 
👹राहु ~ कर्क♋
👺केतु ~ मकर♑

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।
                                       
                  
 💛ACHARYA MUKESH,

Friday, 25 January 2019

आज का पंचांग / 26 जनवरी 2019 शनिवार / माघ कृष्ण पक्ष, षष्ठी


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

1:- तिथि  2:- वार  3:- नक्षत्र  4:- योग  और  5:- करण .

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।

शास्त्रों के अनुसार नित्य उस दिन की तिथि का नाम लेने उसका नाम सुनने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वार का नाम लेने सुनने से आयु में वृद्धि, नक्षत्र का नाम लेने सुनने से पापो का नाश होता है।
योग का नाम लेने सुनने से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और करण का नाम लेने सुनने से समस्त मनोकामनायें पूर्ण होती है। इसलिए निरंतर शुभ समय के लिए प्रत्येक मनुष्य को नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

26 जनवरी 2019 शनिवार का पंचांग 

🌞↗️सूर्योदय - 07:16  🌞↘️सूर्यास्त - 17:51 
🌕↗️चन्द्रोदय - 23:37🌘↘️चन्द्रास्त - 11:01

पञ्चाङ्ग
🔘वार- शनिवार  💠तिथि -  कृष्ण पक्ष (पौष)
षष्ठी - 16:19 तक सप्तमी

नक्षत्र
हस्त - 15:05 तक
चित्रा

योग
सुकर्मा - 11:53 तक
धृति

करण
वणिज - 16:19 तक
विष्टि - 27:35+ तक
बव

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर (विरोधाकृत)

शक संवत - 1940 (विलंबी)

अयन - उत्तरायण

वैदिक ऋतु:- हेमन्त

द्रिक ऋतु:-शिशिर

मास - माघ माह

सूर्य राशि 

मकर

चन्द्र राशि
कन्या - 26:40+ तक
तुला

सूर्य नक्षत्र

श्रवण

🌅दिनमान
10 घण्टे 34 मिनट्स 30 सेकण्ड्स

🌌रात्रिमान
13 घण्टे 25 मिनट्स 04 सेकण्ड्स


🙏शुभ समय🙏

अभिजित मुहूर्त
12:13 से 12:55

अमृत काल
09:25 से 10:56
विजय मुहूर्त
14:19 से 15:02
द्विपुष्कर योग
16:19 से 31:16+

⛔अशुभ समय⛔

🚫गुलिक काल
07:16 से 08:36
🚷यमगण्ड
13:53 से 15:12
👹राहुकाल
09:55 से 11:14
😈दुर्मुहूर्त
07:16 से 07:59
07:59 से 08:41
😡वर्ज्य
22:52 से 24:25+
😈भद्रा

16:19 से 27:35+

ऊपर दिए गए राहुकाल का आकलन दिल्ली के सूर्योदय को ध्यान में रखते हुए किया गया है !

राहुकाल सप्ताह के सातों दिन में निश्चित समय पर लगभग 90 मिनट तक रहता है। इसे अशुभ समय के रूप मे देखा जाता है और इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है। राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है। इसका कारण यह है की सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है। इस सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है। सप्ताह के प्रथम दिवस अर्थात सोमवार के प्रथम भाग में कोई राहु काल नहीं होता है। यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनिवार को तीसरे भाग, शुक्रवार को चौथे भाग, बुधवार को पांचवे भाग, गुरुवार को छठे भाग, मंगलवार को सातवे तथा रविवार को आठवे भाग में होता है। यह प्रत्येक सप्ताह के लिये निश्चित रहता है।

इस गणना में सूर्योदय के समय को प्रात: 06:00 (भा.स्टै.टा) बजे का मानकर एवं अस्त का समय भी सांयकाल 06:00 बजे का माना जाता है। इस प्रकार मिले 12 घंटों को बराबर आठ भागों में बांटा जाता है। इन बारह भागों में प्रत्येक भाग डेढ घण्टे का होता है। हां इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वास्तव में सूर्य के उदय के समय में प्रतिदिन कुछ परिवर्तन होता रहता है और इसी कारण से ये समय कुछ खिसक भी सकता है। अतः इस बारे में एकदम सही गणना करने हेतु सूर्योदय व अस्त के समय को पंचांग से देख आठ भागों में बांट कर समय निकाल लेते हैं जिससे समय निर्धारण में ग़लती होने की संभावना भी नहीं रहती है।
रविवार -सायं -4.30 से 6.00 तक।
सोमवार -प्रातः -7.30 से9.00 तक।
मंगलवार -दिन -3.00 से 4.30तक।
बुधवार -दिवा -12.00 से 1.30तक।
गुरूवार -दिन -1.30 से 3.00तक।
शुक्रवार -प्रातः -10.30 से12.00तक।
शनिवार -प्रातः -9.00 से 10.30तक।

⚓निवास और शूल
होमाहुति- गुरु
🔥अग्निवास :-
आकाश - 16:19 तक
पाताल
दिशाशूल (Dishashool)- पूर्व


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~मकर♑
🌙चंद्र-राशि~♍कन्या 
🔺मंगल ~ मीन♓
🔘बुध(अस्त⬇️)~ मकर♑
🔶बृहस्पति~वृश्चिक♏
◽शुक्र ~ वृश्चिक♏
◾शनि~धनु♐ 
👹राहु ~ कर्क♋
👺केतु ~ मकर♑

नोट :- पंचांग  को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए ।
                                       
                  
 💛ACHARYA MUKESH,