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Acharya Mukesh

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

Acharya Mukesh...Astro Nakshatra 27

“कुछ अलग करना है, तो भीड़ से हट कर चलो, भीड़ साहस तो देती है, पर पहचान छिन लेती है।”

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Thursday, 6 December 2018

बृहस्पति ग्रह अनुकूलता पाने के 10 सरल उपाय | ACHARYA MUKESH |



आज बृहस्पतिवार है देव गुरू बृहस्पति का दिन। शास्त्रों के मुताबिक गुरु बल ही ईश्वर कृपा को संभव बना देता है। इसलिए गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप भी बताया गया है। गुरुवार गुरु भक्ति से ही जीवन में घुली अशांति और कलह को दूर करने का शुभ दिन है। ज्ञान के देवता गुरु बृहस्पति माने गए हैं। आइये Astro Nakshatra 27 से आचार्य मुकेश के द्वारा जानें कुछ बहुमूल्य सुझाव जिसे अपनाने से आपकी परेशानियां समाप्त हो सकती हैं:-

                          

बृहस्पति ग्रह सूर्य से 5वां और हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसे गैस का दानव भी कहते हैं। पीले रंग का यह ग्रह अनेक नकारात्मक परिस्थिति को सकारात्मक बना देता है। जैसे शादी नहीं हो रही हो, नौकरी व्यवसाय में सफलता नहीं मिल रही हो, मुकदमे में विजय नहीं मिल रही हो। कोई बीमारी ठीक नहीं हो रही हो, घर ,प्रॉपर्टी,गाड़ी इत्यादि-इत्यादि काम में सफलता नहीं मिल रही हो,तलाक की स्थिति बन रही हो। यदि इन पर बृहस्पति देव की दृष्टि हो जाए तो आपका काम तुरंत होता है। 

1. बृहस्पति ग्रह 90% हाइड्रोजन, 10% हीलियम और कुछ मात्रा में मिथेन, पानी, अमोनिया और चट्टानी कणों से मिलकर बना हुआ है। 

2. बृहस्पति ग्रह को सौरमंडल का ‘वैक्युम क्लीनर’ भी कहा जाता हैं यह पृथ्वी को विनाशकारी हमलों से बचाता हैं क्योंकि ये सारी छोटी मोटी उल्का- पिण्डों को अपनी तीव्र शक्ति से अपनी ओर खींच लेता है। ठीक वैसे ही ज्योतिषिय संदर्भ में आपकी जीवन के सारे ग्रहों की नकरात्मक ऊर्जा भी ये खींचने में सक्षम है।

                                      

3. बृहस्पति ग्रह को कुंडली में अनुकूल करने का सटीक तरीका यह है :

बृहस्पति ग्रह की अनुकूलता हेतु देवगुरु बृहस्पति के मंत्रो का जाप सबसे अधिक फल प्रदान करता है।

यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति प्रतिकूल प्रभाव दे रहे हैं तो आप को तुलसी की माला से निम्न मंत्र का जाप कुल 88000 जाप बृहस्पति के नक्षत्र में किसी सक्षम ब्राह्मण से करा कर अग्निवास में हवन कराएं। लाभप्रद सिद्ध होगा। मंत्र निम्नवत है -

ॐ ऐ क्लीं बृहस्पतये नमः या ॐ क्रीं कृष्णाय नमः 

या जातक स्वयं ॐ बृं बृहस्पतये नमः का जाप अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार प्रतिदिन कर सकते हैं। 

                                   

4. बृहस्पति को अनुकूल बनाने का दूसरा आसान तरीका है बृहस्पति के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा अथवा पूर्वा-भाद्रपद)   में 'विष्णु सहस्त्रनाम' के 108 पाठ कराएं।

5. बृहस्पति ग्रह की अनुकूलता हेतु व्रत उपवास सप्ताह के दिवस बृहस्पतिवार को रखा जाता है। किसी भी माह के शुक्ल पक्ष में अनुराधा नक्षत्र और गुरुवार के योग के दिन इस व्रत की शुरुआत करना चाहिए। नियमित सात व्रत करने से गुरु ग्रह से उत्पन्न होने वाला अनिष्ट नष्ट होता है।

सावधानी: यदि बृहस्पति अस्त हो तो व्रत प्रारंभ नहीं करना चाहिए।

कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर मनोकामना पूर्ति के लिए बृहस्पति देव से प्रार्थना करनी चाहिए। पीले रंग के चंदन, अन्न, वस्त्र और फूलों का इस व्रत में विशेष महत्व होता है।

बृहस्पतिवार व्रत के पूजन से स्त्री-पुरुष को वृहस्पतिदेव की अनुकम्पा से धन-संपत्ति का अपार लाभ होता है। परिवार में सुख तथा शांति रहती है। स्त्रियों के लिए बृहस्पतिवार का व्रत बहुत शुभ फल देने वाला है। बृहस्पतिवार का नियमित व्रत रखने वाली स्त्री की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
                                        

6. ज्योतिष के अनुसार हल्दी के पीले रंग को बृहस्पति से जोड़ा जाता है, इसलिए ज्योतिषशास्त्र के अंतर्गत किसी जातक की कुंडली में मौजूद कमजोर बृहस्पति को मजबूती प्रदान करने के लिए हल्दी का प्रयोग किया जाता है। बृहस्पति को मजबूत करने के लिए यह एक रामबाण इलाज माना गया है।

अब आप सोच रहे होंगे कि पीली हल्दी बृहस्पति को कैसे मजबूती प्रदान कर सकती है। तो चलिए जानते हैं कि पीली हल्दी की सहायता से किस तरह मजबूती प्रदान की जा सकती है।


7. गांठ वाली हल्दी-

गांठ वाली हल्दी को एक पीले धागे में बांधकर अपने बाजू या गले में पहनें। यह टोटका पीले पुखराज की तरह कार्य करता है जो बृहस्पति को मजबूत करने में सहायता देता है। अगर आप भी हल्दी धारण करने का मन बना रहे हैं तो इसे गुरुवार के दिन ही पहनें, शुभ फल मिलेगा।

8. यदि शादी में बाधाएं आ रही हो -

ज्योतिष में बृहस्पति को मजबूती प्रदान करने के अलावा जल्दी शादी के लिए भी हल्दी का प्रयोग किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति की शादी में लगातार बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं या फिर किसी कारणवश विवाह संभव नहीं हो पा रहा है तो उसके लिए कुछ टोटके हैं।


9. शास्त्रों में तुलसी के बाद केले के पौधे को अत्यंत शुभ माना गया है, किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है केले के पेड़ ! इसका सम्बन्ध बृहस्पति ग्रह से जोड़ा जाता है! धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक केले के पेड़ में साक्षात देवगुरु बृहस्पति का वास होता है और गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति यानी कि भगवान विष्णु का दिन होता है। हिंदू धर्म में पेड़-पौधों में भी देवताओं का वास माना गया है। शुभ कार्यों में केले के पौधे का मंडप और तोरण बनाने की परंपरा पायी जाती है. देव कार्यों में या देवताओं के लिए केले के पत्ते पर ही भोजन का प्रावधान है. केले की जड़ को पीले धागे में बांधकर धारण करने से बृहस्पति मजबूत होता है! घर में तुलसी के पौधे के अलावा केले का पेड़ लगाना कई दुख और संकट से छुटकारा दिलाता है।

इस उपाय को अपनाने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे।



10. बृहस्पति की शुभता के लिए रत्न : (पुखराज ):- वैदिक ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति का प्रत्येक कुंडली में विशेष महत्व है तथा किसी कुंडली में बृहस्पति का बल, स्वभाव और स्थिति कुंडली से मिलने वाले शुभ या अशुभ परिणामों पर बहुत प्रभाव डाल सकती है। बृहस्पति के बल के बारे में चर्चा करें तो विभिन्न कुंडली में बृहस्पति का बल भिन्न भिन्न होता है जैसे किसी कुंडली में बृहस्पति बलवान होते हैं तो किसी में निर्बल जबकि किसी अन्य कुंडली में बृहस्पति का बल सामान्य हो सकता है।  विभिन्न कारणों के चलते यदि बृहस्पति किसी कुंडली में निर्बल रह जाते हैं तो ऐसी स्थिति में बृहस्पति उस कुंडली तथा जातक के लिए अपनी सामान्य और विशिष्ट विशेषताओं के साथ जुड़े फल देने में पूर्णतया सक्षम नहीं रह पाते जिसके कारण जातक को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कुंडली में निर्बल बृहस्पति को ज्योतिष के कुछ उपायों के माध्यम से अतिरिक्त उर्जा प्रदान की जाती है जिससे बृहस्पति कुंडली में बलवान हो जायें तथा जातक को लाभ प्राप्त हो सकें। बृहस्पति को किसी कुंडली में अतिरिक्त उर्जा प्रदान करने के उपायों में से उत्तम उपाय है बृहस्पति का रत्न पीला पुखराज धारण करना जिसे धारण करने के पश्चात धारक को बृहस्पति के बलवान होने के कारण लाभ प्राप्त होने आरंभ हो जाते हैं।

पीला पुखराज रत्न बृहस्पति की उर्जा तरंगों को अपनी उपरी सतह से आकर्षित करके अपनी निचली सतह से धारक के शरीर में स्थानांतरित कर देता है जिसके चलते जातक के आभामंडल में बृहस्पति का प्रभाव पहले की तुलना में बलवान हो जाता है तथा इस प्रकार बृहस्पति अपना कार्य अधिक बलवान रूप से करना आरंभ कर देते हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि बृहस्पति का रत्न पीला पुखराज किसी कुंडली में बृहस्पति को केवल अतिरिक्त बल प्रदान कर सकता है तथा पीला पुखराज किसी कुंडली में बृहस्पति के शुभ या अशुभ स्वभाव पर कोई प्रभाव नहीं डालता। इस प्रकार यदि किसी कुंडली में बृहस्पति शुभ हैं तो पीला पुखराज धारण करने से ऐसे शुभ बृहस्पति को अतिरिक्त बल प्राप्त हो जायेगा जिसके कारण जातक को बृहस्पति से प्राप्त होने वाले लाभ अधिक हो जायेंगें जबकि यही बृहस्पति यदि किसी जातक की कुंडली में अशुभ है तो बृहस्पति का रत्न धारण करने से ऐसे अशुभ बृहस्पति को और अधिक बल प्राप्त हो जायेगा जिसके चलते ऐसा अशुभ बृहस्पति जातक को और भी अधिक हानि पहुंचा सकता है। इस लिए बृहस्पति का रत्न पीला पुखराज केवल उन जातकों को पहनना चाहिये जिनकी कुंडली में बृहस्पति शुभ रूप से कार्य कर रहे हैं तथा ऐसे जातकों को बृहस्पति का रत्न कदापि नहीं धारण करना चाहिये जिनकी कुंडली में बृहस्पति अशुभ रूप से कार्य कर रहें हैं।
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आचार्य मुकेश
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Wednesday, 5 December 2018

आज का पञ्चाङ्ग। 6 दिसंबर 2018। चतुर्दशी।



हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-



1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day) 
3:- नक्षत्र (Nakshatra) 
4:- योग (Yog) और 
5:- करण (Karan)

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।

     06 दिसम्बर 2018 का पंचांग :- 

                     🍁 दिन~ गुरुवार
🌞↗️सूर्योदय :- प्रातः 07:04
☀️↘️सूर्यास्त :- सायं 05:20🌜↗️चन्द्रोदय~30:44 AM+. ↘️चन्द्रास्त~ 16:55.

✡️विक्रम सम्वत्~  2075(विरोधाकृत) 
🍁शकसम्वत्~1940 (विलंबी)
🍁द्रिक अयन~  दक्षिणायण
🌼द्रिक ऋतु~शरद
🌼मास~मार्गशीर्ष(अगहन)
⚫पक्ष~कृष्ण पक्ष 
               🔟तिथि ~ चतुर्दशी 12:12 तक 
                      ततपश्चात अमावस्या⚫

तिथि का स्वामी - चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी है तथा अमावस्या तिथि के स्वामी पित्रदेव है।चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। अतः प्रत्येक मास की चतुर्दशी विशेषकर कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन शिव जी की पूजा, अर्चना एवं रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, भक्तो के सभी संकट दूर होते है । चतुर्दशी को सभी शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए शास्त्रों में मना किया गया।


                        🔶वार :- गुरुवार
🔆नक्षत्र :- अनुराधा - 28:36, दिसम्बर 07 तक,ज्येष्ठा

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :अनुराधा नक्षत्र के देवता मित्र देव है।
नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र:
अनुराधा - २८:३६+ तक
योग:
सुकर्मा - २१:३८ तक
प्रथम करण:
शकुनि - १२:११ तक

द्वितीय करण:
चतुष्पाद - २४:२७+ तक


अशुभ समय
दुर्मुहूर्त:
१०:२९ - ११:१०
वर्ज्य:
०७:४५ - ०९:२५

१४:३५ - १५:१६

राहुकाल:
१३:२८ - १४:४५
गुलिक काल:
०९:३८ - १०:५५
यमगण्ड:
०७:०४ - ०८:२१
शुभ समय
अभिजित मुहूर्त: ११:५१ - १२:३२
अमृत काल: १७:४५ - १९:२५
अन्य
आनन्दादि योग:
आनन्द - २८:३६+ तक

होमाहुति: केतु - २८:३६+ तक
अग्निवास: पृथ्वी

निवास और शूल
दिशा शूल: दक्षिण में
राहु काल वास: दक्षिण में
नक्षत्र शूल: पूर्व में २८:३६+ से
चन्द्र वास: उत्तर में
ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~ वृश्चिक♏
🌙चंद्र-राशि~वृश्चिक♏
🏵सूर्य नक्षत्र~ ज्येष्ठा
🔺मंगल ~ कुम्भ♓
🔘बुध(वक्री↩️)~ वृश्चिक♏
🔶बृहस्पति(अस्त⬇️)~वृश्चिक♏
◽शुक्र ~ तुला♎
◾शनि ~धनु♐
👹राहु ~ कर्क♋
👺केतु ~ मकर♒
                                          

नोट :- पंचांग ( Panchang ) को नित्य पढ़ने से सभी देवता प्रसन्न रहते है, जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराके पुण्य भी अर्जित करना चाहिए ।
आचार्य मुकेश
Astro Nakshatra 2

Monday, 3 December 2018

मंगलवार का पंचांग, 04 December 2018, Panchang, पंचांग, Aaj Ka Panchang, आज का पंचांग


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day) 
3:- नक्षत्र (Nakshatra) 
4:- योग (Yog) और 
5:- करण (Karan)

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।


     04 दिसम्बर 2018 का पंचांग :- 

                                                                 🍁दिन~  मंगलवार
🌞↗️सूर्योदय :- प्रातः 07:03
☀️↘️सूर्यास्त :- सायं 05:20
  🌜↗️चन्द्रोदय~28:49 AM+. ↘️चन्द्रास्त~ 15:36.

✡️विक्रम सम्वत्~  2075(विरोधाकृत) 
🍁शकसम्वत्~1940 (विलंबी)
🍁द्रिक अयन~  दक्षिणायण
🌼द्रिक ऋतु~शरद
🌼मास~मार्गशीर्ष(अगहन)
⚫पक्ष~कृष्ण पक्ष 
                                              🔟तिथि ~ द्वादशी 12:20 तक

तिथि का स्वामी - द्वादशी तिथि के स्वामी विष्णु है तथा त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव है ।
द्वादशी तिथि के स्वामी श्री हरि विष्णु जी हैं। द्वादशी को इनकी पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त सुख और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है। द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है। द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है। द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है।

                                       🔴वार :- मंगलवार
🔆नक्षत्र :- स्वाती - 03:00 AM, दिसम्बर 05 तक, विशाखा

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :- स्वाती नक्षत्र के देवता समीर है एवं विशाखा नक्षत्र के देवता इन्द्र और अग्नि है ।


योग (Yog) - शोभन - 11:49 PM तक अतिगण्ड

प्रथम करण : - तैतिल 12:20

द्वितीय करण : - गर 5 दिसम्बर 12:08

शुभ समय


अभिजित मुहूर्त
11:51 AM से 12:32 PM
अमृत काल
06:09 PM से 07:45 PM
विजय मुहूर्त
01:54 PM से 02:35 PM
गोधूलि मुहूर्त
05:09 PM से 05:33 PM
सायाह्न सन्ध्या
05:20 PM से 06:42 PM
निशिता मुहूर्त
11:44 PM से 12:39 AM, दिसम्बर 05
ब्रह्म मुहूर्त
05:14 AM, दिसम्बर 05 से 06:09 AM., दिसम्बर 05
प्रातः सन्ध्या
05:41 AM, दिसम्बर 05 से 07:03 AM., दिसम्बर 05


👿गुलिक काल : - दोपहर 12:11 से 13:28 बजे तक 
👹राहुकाल :- 14:45 से 16:03 तक ।
 राहुकाल में कोई भी नया शुभ कार्य एवं यात्रा नहीं करनी चाहिए। 

यमगण्ड :-09:37 AM से 10:54 PM
दुर्मुहूर्त:-09:06 PM से 09:47 PM 22:49 PM से 23:44 PM

☢️दिशाशूल - 
मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है । सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।

विशेष -
 द्वादशी को पोई का सेवन नहीं करना चाहिए ।
पर्व त्यौहार- द्वादशी तिथि यात्रादि को छोड़कर सभी धार्मिक शुभ कार्य किये जा सकते हैं।


ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~ वृश्चिक♏
🌙चंद्र-राशि~तुला♎
🏵सूर्य नक्षत्र~ ज्येष्ठा
🔺मंगल ~ कुम्भ♓
🔘बुध(वक्री↩️)~ वृश्चिक♏
🔶बृहस्पति(अस्त⬇️)~वृश्चिक♏
◽शुक्र ~ तुला♎
◾शनि ~धनु♐
👹राहु ~ कर्क♋
👺केतु ~ मकर♒
                                          🔥अग्निवास➡️पृथ्वी 

नोट :- पंचांग ( Panchang ) को नित्य पढ़ने से सभी देवता प्रसन्न रहते है, जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराके पुण्य भी अर्जित करना चाहिए ।
आचार्य मुकेश
Astro Nakshatra 27

Sunday, 2 December 2018

3 DECEMBER 2018।पंचांग (PANCHANG)। सोमवार का पंचांग ( SOMVAR KA PANCHANG ), उत्पन्ना एकादशी व्रत, आज का पंचांग ( AAJ KA PANCHANG )


हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं 
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day) 
3:- नक्षत्र (Nakshatra) 
4:- योग (Yog) और 
5:- करण (Karan)

शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।


   03 दिसम्बर 2018 का पंचांग :- 



                         🍁दिन~  सोमवार 
🌞↗️सूर्योदय :- प्रातः 07:02
☀️↘️सूर्यास्त :- सायं 05:20
  🌜↗️चन्द्रोदय~03:50 AM+. ↘️चन्द्रास्त~ 14:59.


✡️विक्रम सम्वत्~  2075(विरोधाकृत) 
🍁शकसम्वत्~1940 (विलंबी)
🍁द्रिक अयन~  दक्षिणायण
🌼द्रिक ऋतु~शरद
🌼मास~मार्गशीर्ष(अगहन)
⚫पक्ष~कृष्ण पक्ष 
                   🔟तिथि ~ एकादशी  13:00 तक

तिथि का स्वामी - एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी है तथा द्वादशी तिथि के स्वामी विष्णु है ।

एकादशी के दिन भगवान श्रीविष्णु का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से भगवान अपने भक्त से शीघ्र प्रसन्न हो जाते है जातक को जीवन में कभी भी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता है ,उसका घर सदैव धन धान्य से भरा रहता है ।


एकादशी के दिन भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख में गंगा जल / जल भरकर उस से भी अभिषेक करें । इस उपाय से माँ लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती है और जातक पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों की पूर्ण कृपा होती हैं।

सोमवार के दिन शिवलिंग पर मिश्री चढ़ाकर फिर जल चढ़ाएं। अथवा किसी भी शिव मंदिर में मिश्री का पैकेट अर्पित करें।

                           🔴वार :- सोमवार

🔆नक्षत्र :- 



Chitra
चित्रा - 02:50 AM, दिसम्बर 04 तक
Swati
स्वाती

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :- 
चित्रा नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा है एवं स्वाती नक्षत्र के देवता समीर है ।

योग (Yog) - 
सौभाग्य 4 दिसम्बर 01:24, शोभन

प्रथम करण : - बालव 01:00

द्वितीय करण : - कौलव 4 दिसम्बर 12:37 , 
तैतिल

गुलिक काल : - दोपहर 1:30 से 3 बजे तक
👹राहुकाल :- सोमवार को राहुकाल सुबह- 08:19 से 09:36 तक । राहुकाल में कोई भी नया शुभ कार्य एवं यात्रा नहीं करनी चाहिए। 

यमगण्ड :-10:54 AM से 12:11 PM
दुर्मुहूर्त:-12:31 PM से 01:13 PM 02:35 PM से 03:16 PM


☢️दिशाशूल - 
सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है । इस दिन कार्यो में श्रेष्ठ सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।

विशेष -
एकादशी में चावल और सेम की फली नहीं खानी चाहिए , इस दिन इनके सेवन से पाप और रोग बढ़ता है ।

पर्व त्यौहार- उत्पन्ना एकादशी

मुहूर्त -एकादशी व्रत, उपवास, धार्मिक कृत्य, देवोत्सव, उद्यापन तथा कथा एकादशी में शुभ है।



ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~ वृश्चिक♏
🌙चंद्र-राशि~कन्या♍ 02:53
🏵सूर्य नक्षत्र~ ज्येष्ठा-1
🔺मंगल ~ कुम्भ♓
🔘बुध(वक्री↩️)~ वृश्चिक♏
🔶बृहस्पति(अस्त⬇️)~वृश्चिक♏
◽शुक्र ~ तुला♎
◾शनि ~धनु♐
👹राहु ~ कर्क♋
👺केतु ~ मकर♒
                           🔥अग्निवास~आकाश - 13:00  तक, पाताल

नोट :- पंचांग ( Panchang ) को नित्य पढ़ने से सभी देवता प्रसन्न रहते है, जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराके पुण्य भी अर्जित करना चाहिए ।

आचार्य मुकेश
Astro Nakshatra 27

उत्पन्ना एकादशी व्रत | जानिये उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा, तिथि, मुहूर्त, एकादशी-आरती व पूजा विधि | 3rd December 2018 Monday / सोमवार (Utpanna Ekadashi Vrat)

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एकादशी व्रत कथा व महत्व के बारे में तो सभी जानते हैं। हर मास की कृष्ण व शुक्ल पक्ष को मिलाकर दो एकादशियां आती हैं। यह भी सभी जानते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। लेकिन यह बहुत कम जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी जिनका जन्म भगवान विष्णु से हुआ था। एकादशी मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी को प्रकट हुई थी जिसके कारण इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा। इसी दिन से एकादशी व्रत शुरु हुआ था। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत अधिक महत्व माना जाता है इसलिये यह जानकारी होना जरूरी है कि एकादशी का जन्म कैसे और क्यों हुआ।

उत्पन्ना एकादशी तिथि व मुहूर्त

एकादशी व्रत तिथि – 03 दिसंबर 2018

पारण का समय – 07:02 से 09:06 बजे तक (4 दिसंबर 2018)

पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त - 12:19 बजे (4 दिसंबर 2018)

एकादशी तिथि प्रारंभ – 14:00 बजे से (2 दिसंबर 2018))

एकादशी तिथि समाप्त – 12:59 बजे (3 दिसंबर 2018))

नोट: चूंकि हिंदू मान्यताओं के अनुसार तिथि सूर्योदय के पश्चात मानी जाती है इसलिये एकादशी तिथि का उपवास 3 दिसंबर को रखा जायेगा जिसका पारण 4 दिसंबर को होगा।

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उत्पन्ना एकादशी व्रत व पूजा विधि

नारदपुराण के अनुसार, जातक ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घट स्थापना करें और उसके ऊपर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें और गंगाजल के छींटे दें। भगवान की तस्वीर या मूर्ति पर रोली और अक्षत से तिलक करें और सफेद फूल चढ़ाएं। इसके बाद घी का एक दीपक जलाएं और उनकी आरती उतारें। इसके बाद उनका भोग लगाएं। फिर ब्राह्मण को भोजन कराकर दान व दक्षिणा देते हैं। इस दिन किसी भी एक समय फलाहार किया जाता है।


आचार्य मुकेश के अनुभवों के आधार पर कुछ सुझाव:


एकादशी के व्रत की तैयारी दशमी तिथि को ही आरंभ हो जाती है। उपवास का आरंभ दशमी की रात्रि से ही आरंभ हो जाता है। इसमें दशमी तिथि को सायंकाल भोजन करने के पश्चात अच्छे से दातुन कुल्ला करना चाहिये ताकि अन्न का अंश मुंह में शेष न रहे। इसके बाद रात्रि को बिल्कुल भी भोजन न करें। अधिक बोलकर अपनी ऊर्जा को भी व्यर्थ न करें। रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी के दिन प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले व्रत का संकल्प करें। नित्य क्रियाओं से निपटने के बाद स्नानादि कर स्वच्छ हो लें। भगवान का पूजन करें, व्रत कथा सुनें। दिन भर व्रती को बुरे कर्म करने वाले पापी, दुष्ट व्यक्तियों की संगत से बचना चाहिये। रात्रि में भजन-कीर्तन करें। जाने-अंजाने हुई गलतियों के लिये भगवान श्री हरि से क्षमा मांगे। द्वादशी के दिन प्रात:काल ब्राह्मण या किसी गरीब को भोजन करवाकर उचित दान दक्षिणा देकर फिर अपने व्रत का पारण करना चाहिये। इस विधि से किया गया उपवास बहुत ही पुण्य फलदायी होता है।


एकादशी करते हों तो ध्यान रखें कुछ बातों का :


🚫1. एकादशी के दिन सुबह दातुन या ब्रश न करें!नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। * यदि यह संभव न हो तो पानी से बारह बार कुल्ले कर लें।

🚫2. एकादशी के दिन झाड़ू पोछा इत्यादि बिलकुल न करें! क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है।

🚫3. एकादशी के दिन तुलसीदल न तोड़ें, भगवन को भोग लगाने हेतु एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें।

🚫4. अगर घर में दक्षिणावर्ती शंख हो तो उसमे जल लेकर भगवान शालिग्राम को स्नान करवाएं, या पंचामृत से स्नान करवाएं!इस से सारे पाप उसी समय नष्ट हो जाते हैं तथा माता लक्ष्मी के साथ भगवान् हरि भी अति प्रशन्न होते हैं।

🚫5.एकादशी के दिन भगवान् श्री हरि को पीली जनेऊ अर्पित करें। पान के पत्ते पर एक सुपारी, लौंग, इलायची, द्रव्य, कपूर, किसमिस तुलसीदल के साथ इत्यादि अर्पित करें, साथ ही ऋतुफल भी अर्पित करें! एक तुलसीदल भगवान् पर भी चढ़ाएं पर रात्रि में उसे हटाना न भूले।

🚫6.एकादशी के दिन सुबह संकल्प लें, मन में मनोकामना करते हुए श्री हरि से व्रत में रहने का संकल्प करें!

🚫7. एकादशी के दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व है, कोशिश करें की इस एकादशी जरूर जागरण करें, इस से व्रत फल 100 गुणा बढ़ जाता है!

🚫8. एकादशी के दिन चावल भूल से भी न छुएं, न ही घर में चावल बनें, इस दिन चावल खाने से बेहद नकरात्मक फल प्राप्त होते हैं, भाग्य खंडित होता है! एकादशी (ग्यारस) के दिन व्रतधारी व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। * केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें। * प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए।

🚫9. एकादशी के दिन कम से कम बोलें, पापी लोगों से बात न करें, जिनके मन में लालच, पाप या कोई भी अनैतिक तत्व दिखे कम से कम इस दिन उन सभी से दूर रहने का प्रयत्न करें! परनिंदा से बचें!

🚫10.श्री हरि की विशेष कृपा हेतु ॐ नमो भगवते वासुदेवाय की 11 माला सुबह और 11 माला शाम में करें, साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जरूर करें! एकादशी व्रत कथा कहे या सुनें।

🚫11. शाम में केले के पेड़ के नीचे एवं तुलसी में दीपक जलाना न भूले, इसे दीप-दान कहते हैं!

🚫12. माता लक्षमी के बिना विष्णु अधूरे हैं इसलिए माता की भी आरती अवश्य करें, सुबह और शाम शंखनाद एवं घंटियों की ध्वनि में ॐ जय जगदीश हरे की आरती करना न भूले!

🚫13. एकादशी के दिन केले के पेड़ की 7 परिक्रमा करने से धन में बढ़ोतरी होती है!

🚫14. व्रत पंचांग के समयानुसार ही खोलें अन्यथा लाभ की जगह नुक्सान भी हो सकता है, व्रत एवं पूजा के नियमों में करने से ज्यादा कुछ बातें जो हमे नहीं करनी चाहिए वो ही ज्यादा महत्व रखती है. अतः सावधानी से की गई पूजा सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करती है.

🚫15 .आज के दिन किसका त्याग करें- 

🍁मधुर स्वर के लिए गुड़ का। 
🍁दीर्घायु अथवा पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति के लिए तेल का। 🍁शत्रुनाशादि के लिए कड़वे तेल का। 
🍁सौभाग्य के लिए मीठे तेल का। 
🍁स्वर्ग प्राप्ति के लिए पुष्पादि भोगों का। 

प्रभु शयन के दिनों में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जहाँ तक हो सके न करें। पलंग पर सोना, भार्या का संग करना, झूठ बोलना, मांस, शहद और दूसरे का दिया दही-भात आदि का भोजन करना, मूली, पटोल एवं बैंगन आदि का भी त्याग कर देना चाहिए।


🚫16. दोनों ही दिन शाम में संध्या आरती कर दीपदान करें। अखंड लक्षमी प्राप्त होगी। पैसा घर में रुकेगा।

🚫17. शंख ध्वनि से भी माता लक्ष्मी के साथ भगवान् हरि भी अति प्रसन्न होते हैं। अतः पूजा के समय जरूर शंख का उपयोग करें । पूजा के पहले शुद्धिकरण मंत्र तथा आचमन करना न भूलें क्योंकि इसके बिना पूजा का फल प्राप्त नहीं हो पाता।

🚫18. तुलसी की विधिवत पूजा करके उसकी 7 
परिक्रमा करें।


उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

वैसे तो प्रत्येक वर्ष के बारह महीनों में 24 एकादशियां आती हैं लेकिन मलमास या कहें अधिकमास को मिलाकर इनकी संख्या 26 भी हो जाती है। सबसे पहली एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी को माना जाता हैं। चूंकि इस दिन एकादशी प्रकट हुई थी इसलिये यह दिन उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी के जन्म लेने की कथा कुछ इस प्रकार है।

बात सतयुग की है कि चंद्रावती नगरी में ब्रह्मवंशज नाड़ी जंग राज्य किया करते थे। मुर नामक उनका एक पुत्र भी था। मुर बहुत ही बलशाली दैत्य था। उसने अपने पराक्रम के बल पर समस्त देवताओं का जीना मुहाल कर दिया। इंद्र आदि सब देवताओं को स्वर्गलोक से खदेड़कर वहां अपना अधिकार जमा लिया। कोई भी देवता उसके पराक्रम के आगे टिक नहीं पाता था। सब परेशान रहने लगे कि कैसे इस दैत्य से छुटकारा मिला। देवताओं पर जब भी विपदा आती तो वे सीधे भगवान शिव शंकर के पास पंहुचते। इस बार भी ऐसा ही हुआ। इंद्र के नेतृत्व में समस्त देवता कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के पास पंहुची और अपनी व्यथा सुनाई। भगवान शिव ने उनसे कहा कि भगवान विष्णु ही इस कार्य में उनकी सहायता कर सकते हैं। अब सभी देवता क्षीर सागर पंहुचे जहां श्री हरि विश्राम कर रहे थे। जैसे ही उनकी आंखे खुली तो देवताओं को सामने पाकर उनसे आने का कारण पूछा। देवताओं ने दैत्य मुर के अत्याचार की समस्त कहानी कह सुनाई। भगवान विष्णु ने उन्हें आश्वासन देकर भेज दिया। इसके बाद हजारों साल तक युद्ध मुर और श्री हरि के बीच युद्ध होता रहा लेकिन मुर की हार नहीं हुई। भगवान विष्णु को युद्ध के बीच में ही निद्रा आने लगी तो वे बद्रीकाश्रम में हेमवती नामक गुफा में शयन के लिये चले गये। उनके पिछे-पिछ मुर भी गुफा में चला आया। भगवान विष्णु को सोते हुए देखकर उन पर वार करने के लिये मुर ने जैसे ही हथियार उठाये श्री हरि से एक सुंदर कन्या प्रकट हुई जिसने मुर के साथ युद्ध किया। सुंदरी के प्रहार से मुर मूर्छित हो गया जिसके बाद उसका सर धड़ से अलग कर दिया गया। इस प्रकार मुर का अंत हुआ जब भगवान विष्णु नींद से जागे तो सुंदरी को देखकर वे हैरान हो गये। जिस दिन वह प्रकट हुई वह दिन मार्गशीर्ष मास की एकादशी का दिन था इसलिये भगवान विष्णु ने इनका नाम एकादशी रखा और उससे वरदान मांगने की कही। तब एकादशी ने मांगा कि जब भी कोई मेरा उपवास करे तो उसके समस्त पापों का नाश हो। तब भगवान विष्णु ने एकादशी को वरदान दिया कि आज से प्रत्येक मास की एकादशी का जो भी उपवास रखेगा उसके समस्त पापों का नाश होगा और विष्णुलोक में स्थान मिलेगा। मुझे सब उपवासों में एकादशी का उपवास प्रिय होगा। तब से लेकर वर्तमान तक एकादशी व्रत का माहात्म्य बना हुआ है।

पारण (व्रत तोड़ने का) समय एवं नियम 

4th को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय = 07:02 से 09:06

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है।

एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्यान के बाद पारण करना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।





एकादशी - आरती 

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी...॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी...॥

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी...॥

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी...॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी...॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी...॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी...॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी...॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी...॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी...॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

आरती श्री जगदीशजी 

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।


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Saturday, 1 December 2018

आज का पंचांग । रविवार 2 दिसंबर 2018। दशमी/एकादशी। आचार्य मुकेश।




हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। पंचाग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं 
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day) 
3:- नक्षत्र (Nakshatra) 
4:- योग (Yog) और 
5:- करण (Karan)
शास्त्रों के अनुसार पंचाग को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम जी भी नित्य पंचाग को सुनते थे ।

                02 दिसम्बर 2018 का पंचांग :- 


                       🍁दिन~ रविवार
🌞↗️सूर्योदय :- प्रातः 07:01 
☀️↘️सूर्यास्त :- सायं 05:20
  🌜↗️चन्द्रोदय~26:51+. ↘️चन्द्रास्त~ 14:23.

✡️विक्रम सम्वत्~  2075(विरोधाकृत) 
🍁शकसम्वत्~1940 (विलंबी)
🍁द्रिक अयन~  दक्षिणायण
🌼द्रिक ऋतु~शरद
🌼मास~मार्गशीर्ष(अगहन)
⚫पक्ष~कृष्ण पक्ष 
🔟तिथि ~ दशमी 14:00 तक 
   एकादशी
तिथि का स्वामी - दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है तथा एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी है ।


दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है। इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है, नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है।

इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है ।दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है।

रविवार को अदरक और मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। 

                    🔴वार :- रविवार

🔆नक्षत्र :- हस्त 27:01 तक तदुपरांत चित्रा

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :- हस्त नक्षत्र के देवता रवि है एवं चित्र नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा है ।

योग (Yog) - आयुष्मान् 3 दिसम्बर 03:16 तक

प्रथम करण : - विष्टि (भद्रा)14:00 तक

द्वितीय करण : - बव 3 दिसम्बर 25:28+तक

गुलिक काल : - 14:45 से 16:02 तक 


👹राहुकाल :- रविवार को राहुकाल सायं - 16:02 से 17:20 तक । राहुकाल में कोई भी नया शुभ कार्य एवं यात्रा नहीं करनी चाहिए।

☢️दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । इस दिन यात्रा में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।

विशेष - दशमी को कलम्बी का सेवन नहीं करना चाहिए ।

पर्व त्यौहार -

🚧मुहूर्त - दशमी तिथि को राज संबंधी कार्य
 ( सरकारी कार्य ), व्रतबंध, प्रतिष्ठा, विवाह, यात्रा, भूषणादि के लिए शुभ होते हैं।

🚗दशमी तिथि को यात्रा , शिल्प , चूड़ा कर्म, अन्नप्राशन व गृह प्रवेश शुभ है।
दशमी समस्त शुभ कार्यों के लिए उत्तम है परंतु इस दिन ऋण कतई नहीं देना चाहिए।

ग्रह-स्थिति:
🌞सूर्य-राशि ~ वृश्चिक♏
🌙चंद्र-राशि~कन्या♍
🏵सूर्य नक्षत्र~ अनुराधा
🔺मंगल ~ कुम्भ♓
🔘बुध(वक्री↩️,अस्त⬇️)~ वृश्चिक♏
🔶बृहस्पति(अस्त⬇️)~वृश्चिक♏
◽शुक्र ~ तुला♎
◾शनि ~धनु♐
👹राहु ~ कर्क♋
👺केतु ~ मकर♒
🔥अग्निवास~पृथ्वी🌏

नोट :- पंचांग ( Panchang ) को नित्य पढ़ने से सभी देवता प्रसन्न रहते है, जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराके पुण्य भी अर्जित करना चाहिए ।

आचार्य मुकेश
Astro Nakshatra 27